मिडिल ईस्ट में महायुद्ध के मुहाने पर दुनिया: सऊदी अरब में सैन्य ठिकाने पर ईरान का बड़ा हमला, 10 अमेरिकी सैनिक घायल; कई विमान क्षतिग्रस्त
नई दिल्ली/तेहरान। मिडिल ईस्ट में तनाव अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी सीधे संघर्ष ने वैश्विक सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। ताजा घटनाक्रम में ईरान ने सऊदी अरब स्थित प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर मिसाइल दागकर जवाबी कार्रवाई की है, जिसमें अमेरिकी वायुसेना के पांच एरियल रिफ्यूलिंग प्लेन क्षतिग्रस्त होने की खबर है।
ईरान का पलटवार: अमेरिकी एयर बेस पर मिसाइल हमला
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान द्वारा किए गए इस हमले में अमेरिकी विमान पूरी तरह नष्ट नहीं हुए हैं और उनकी
मरम्मत का काम जारी है। हालांकि, इस हमले में कुछ अमेरिकी सैनिकों के घायल होने की भी सूचना है, लेकिन हताहतों की सटीक संख्या को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि यह हमला ईरान की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह क्षेत्रीय ठिकानों को निशाना बना रहा है।
इजरायली एयरफोर्स ने परमाणु ठिकानों को बनाया निशाना
इजरायल ने शुक्रवार को ईरान के परमाणु कार्यक्रम की कमर तोड़ने के उद्देश्य से यज्द (Yazd) स्थित यूरेनियम प्रोसेसिंग प्लांट पर बड़ा हमला किया। इजराइली सेना का दावा है कि इस फैसिलिटी का इस्तेमाल यूरेनियम इनरिचमेंट के लिए किया जा रहा था। इसके अलावा खोंडाब हेवी वॉटर फैसिलिटी और अरदाकन येलोकैक प्रोडक्शन प्लांट पर भी हमले की खबरें हैं। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल रेडिएशन के स्तर में कोई बढ़ोतरी नहीं देखी गई है।
पश्चिमी ईरान में भारी तबाही, 20 की मौत
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, पश्चिमी ईरान के करमानशाह प्रांत में अमेरिका और इजरायल की संयुक्त बमबारी में कम से कम 20 लोगों की जान चली गई है। मरने वालों में महिलाएं, बच्चे और एक गर्भवती महिला भी शामिल है। करखानेह गांव और करमानशाह शहर के आवासीय इलाकों में हुए इन हमलों ने मानवीय संकट गहरा दिया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि इजरायल को इन हमलों की "भारी कीमत" चुकानी होगी।
ट्रंप का बयान: युद्ध के बाद अब्राहम समझौता ही समाधान
इस भीषण तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मियामी में एक कार्यक्रम के दौरान बड़ा बयान दिया। ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ जारी यह युद्ध समाप्त होने के बाद सऊदी अरब और इजरायल के बीच संबंधों को सामान्य करना अनिवार्य होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है कि सऊदी अरब को अब्राहम समझौते में शामिल किया जाए। हालांकि, सऊदी अरब अभी भी स्वतंत्र फलस्तीनी राज्य की अपनी मांग पर कायम है।
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