केंद्र सरकार का बड़ा कदम: लोकसभा में 'जन विश्वास विधेयक' पेश, छोटी गलतियों पर अब जेल नहीं, सिर्फ लगेगा जुर्माना
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश में 'ईज ऑफ लिविंग' और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देने की दिशा में शुक्रवार को एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। सरकार ने नियमों को सरल बनाने और छोटी-तकनीकी गलतियों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के उद्देश्य से 'जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) विधेयक' लोकसभा में पेश कर दिया। इस विधेयक के माध्यम से 23 मंत्रालयों के अधीन आने वाले 79 केंद्रीय कानूनों के 784 प्रावधानों में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद द्वारा पेश किए गए इस बिल का मुख्य लक्ष्य आम नागरिकों और व्यापारियों को छोटी गलतियों के लिए अदालती चक्करों और जेल की सजा से मुक्ति दिलाना है।
विधेयक की मुख्य विशेषताएं: जेल की जगह जुर्माना और चेतावनी
717 प्रावधानों में बदलाव: तकनीकी और छोटे उल्लंघनों पर अब जेल की सजा का प्रावधान खत्म कर उसे केवल आर्थिक दंड (जुर्माना) या चेतावनी में बदला जाएगा।
67 नागरिक-केंद्रित सुधार: ये संशोधन सीधे तौर पर आम जनता की सुविधाओं को ध्यान में रखकर किए जा रहे हैं।
दोहरी व्यवस्था: पहली बार गलती होने पर केवल 'चेतावनी' दी जाएगी, जबकि दोबारा वही गलती करने पर 'जुर्माना' लगाया जाएगा।
त्वरित निपटारा: मामलों के जल्द समाधान के लिए 'निर्णायक अधिकारी' और 'अपीलीय प्राधिकरण' बनाने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है, जिससे अदालतों पर मुकदमों का बोझ कम होगा।
वाहन चालकों को बड़ी राहत: ड्राइविंग लाइसेंस में 30 दिन की 'ग्रेस पीरियड'
इस विधेयक में मोटर वाहन कानून (Motor Vehicle Act) से जुड़े कुछ बेहद अहम बदलाव प्रस्तावित हैं, जो लाखों वाहन चालकों को राहत देंगे:
30 दिन की छूट: ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता समाप्त होने के बाद अब 30 दिन का 'ग्रेस पीरियड' मिलेगा। इस अवधि के दौरान लाइसेंस को वैध माना जाएगा।
रजिस्ट्रेशन में आसानी: अब गाड़ी का पंजीकरण पूरे राज्य में कहीं भी कराया जा सकेगा, इसके लिए किसी खास क्षेत्राधिकार की बाध्यता नहीं रहेगी।
समय सीमा में बढ़ोतरी: बीमा ट्रांसफर और पंजीकरण रद्द करने की सूचना देने की समय सीमा को 2 सप्ताह से बढ़ाकर 30 दिन करने का प्रस्ताव है।
विपक्ष का विरोध और सरकार का पक्ष
विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस ने इस बिल का विरोध करते हुए तर्क दिया है कि जेल की सजा हटाने से भ्रष्टाचार बढ़ सकता है। हालांकि, सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा, श्रम कानून, सेना और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों से जुड़े गंभीर मामलों को इस कानून से पूरी तरह बाहर रखा गया है। सरकार का मानना है कि इन बदलावों से निवेश बढ़ेगा और नियमों का पालन करना पहले से कहीं अधिक आसान होगा।
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