प्रशासन की बेरुखी: 4 दिनों से कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे बैठे मासूम: 7 छात्राओं की तबीयत बिगड़ी, 2 बेहोश
भीलवाड़ा। जिले के नंदराय कस्बे में शिक्षा के मंदिर से उठी एक मांग अब मासूम बच्चों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ने लगी है। अपने पसंदीदा भूगोल लेक्चरर शंकरलाल जाट के तबादले को रद्द करवाने की मांग को लेकर पिछले 4 दिनों से करीब 600 विद्यार्थी आंदोलन की राह पर हैं। ताज्जुब की बात यह है कि कड़ाके की ठंड में ये मासूम रात भर खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर हैं, लेकिन प्रशासन समाधान की जगह सवाल दाग रहा है।
भूख और ठंड से टूटी हिम्मत, अस्पताल पहुँची छात्राएं
गुरुवार का दिन आंदोलनकारी छात्रों के लिए भारी रहा। सुबह से भूखी-प्यासी बैठी 7 छात्राओं की तबीयत अचानक बिगड़ गई। देखते ही देखते 2 छात्राएं बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़ीं, जबकि 5 अन्य छात्राएं बदहवास होकर रोने लगीं। स्कूल परिसर में चीख-पुकार मच गई। आनन-फानन में टीचर्स ने उन्हें स्टाफ रूम पहुँचाया और डॉक्टर को बुलाकर उपचार करवाया गया।
संवेदना की जगह 'नदियों के नाम' पूछती रहीं SDM
एक ओर जहाँ मासूम बच्चे 4 दिनों से अपनी पढ़ाई और सेहत दांव पर लगाकर बैठे हैं, वहीं प्रशासनिक अधिकारी संवेदनशीलता दिखाने के बजाय छात्रों को नीचा दिखाने की कोशिश करते नजर आए। जब SDM तान्या रिणवा मौके पर पहुँचीं, तो उन्होंने एक छात्र की नारेबाजी पर भड़कते हुए उससे 'अमेरिका की पांच नदियों के नाम' पूछ लिए। छात्र के खामोश रहने पर उसे 'नेता' न बनने की नसीहत दे डाली। प्रशासन का यह रुख ग्रामीणों और छात्रों में भारी आक्रोश पैदा कर रहा है।
पढ़ाई ठप, अब सामूहिक टीसी कटवाने की तैयारी
बोर्ड परीक्षाओं के ऐन पहले हुए इस तबादले ने बच्चों का भविष्य अधर में लटका दिया है। पिछले 4 दिनों से स्कूल में पढ़ाई पूरी तरह ठप है। हार मानकर अब छात्र-छात्राओं ने साफ कह दिया है कि यदि उनके शिक्षक वापस नहीं आए, तो वे सामूहिक रूप से अपनी टीसी (TC) कटवा लेंगे। परिजनों का भी कहना है कि जब बच्चों की सुनने वाला कोई नहीं, तो ऐसे सिस्टम में पढ़ाई का क्या अर्थ?
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