बड़ा फैसला: राजस्थान में 2 बच्चों की बाध्यता खत्म; अब कितने भी बच्चों वाले नेता लड़ सकेंगे निकाय व पंचायत चुनाव
जयपुर। राजस्थान की भजनलाल सरकार पंचायतीराज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनावों में उम्मीदवारों के लिए 'दो बच्चों' की अनिवार्य बाध्यता को पूरी तरह खत्म करने जा रही है। इसके लिए गुरुवार को विधानसभा में राजस्थान पंचायतीराज संशोधन बिल-2026 और नगरपालिका संशोधन बिल-2026 पेश किए जाएंगे।
31 साल पुरानी पाबंदी हटेगी, स्थानीय सियासत पर होगा बड़ा असर
साल 1995 में तत्कालीन भैरोंसिंह शेखावत सरकार ने दो से ज्यादा बच्चों वाले व्यक्तियों के चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी थी। अब करीब 31 साल बाद सरकार इस प्रावधान को समाप्त करने जा रही है। इसी महीने पंचायतीराज चुनाव की घोषणा होने की संभावना है, ऐसे में इस फैसले का स्थानीय सियासत पर गहरा असर पड़ेगा। अब तक जो दिग्गज नेता बच्चों की संख्या के कारण चुनावी मैदान से बाहर थे, उन्हें फिर से मौका मिलेगा। इससे इस बार का चुनावी मुकाबला पहले से कहीं अधिक कड़ा और दिलचस्प होने की उम्मीद है।
विधानसभा में आज रखे जाएंगे बिल
पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर पंचायतीराज संशोधन बिल और यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा नगरपालिका संशोधन बिल को सदन के पटल पर रखेंगे। इन बिलों को पारित करने की अंतिम तिथि गुरुवार को होने वाली कार्य सलाहकार समिति (BAC) की बैठक में तय की जाएगी। माना जा रहा है कि इन्हें 6 मार्च या 9 मार्च तक पारित करवाया जा सकता है।
पंच-सरपंच से लेकर मेयर तक को राहत
दोनों बिल पारित होने के बाद वार्ड पंच, सरपंच, प्रधान, जिला प्रमुख से लेकर पार्षद और मेयर के चुनाव में बच्चों की संख्या कोई बाधा नहीं बनेगी। नए प्रावधानों के अनुसार, अब कितने भी बच्चों वाले नेता लोकतांत्रिक ढंग से चुनाव लड़ने के पात्र होंगे। 25 फरवरी को हुई कैबिनेट बैठक में ही उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़, कानून मंत्री जोगाराम पटेल और डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा की मौजूदगी में इन बिलों को मंजूरी दी गई थी।
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