OBC आयोग की रिपोर्ट में फंसा पेंच: राजस्थान में पंचायत चुनाव समय पर होना मुश्किल, डेटा में मिली भारी खामियां
जयपुर | राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा राज्य सरकार को 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत चुनाव संपन्न कराने के सख्त निर्देश दिए गए थे, लेकिन अब इन चुनावों पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं। इसका मुख्य कारण अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग की रिपोर्ट में हो रही देरी और डेटा संबंधी गंभीर विसंगतियां हैं।
हाल ही में आयोग ने मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास को एक पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट की है। आयोग का कहना है कि जनाधिकार प्राधिकरण द्वारा पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या को लेकर जो आंकड़े उपलब्ध कराए गए हैं, वे अपूर्ण और त्रुटिपूर्ण हैं।
डेटा की कमी से आरक्षण निर्धारण में बाधा
आयोग के अनुसार, वर्तमान में जो नंबर मिले हैं, उनके आधार पर पंचायतों के वार्ड पंच के लिए ओबीसी सीटों का आरक्षण तय करना संभव नहीं है। आयोग ने मांग की है कि सभी जिला कलेक्टर्स को निर्देश दिए जाएं कि वे पंचायतवार सही सूचना और सटीक डेटा जल्द से जल्द आयोग को भिजवाएं।
एससी/एसटी के आंकड़ों पर भी सवाल
सिर्फ ओबीसी ही नहीं, आयोग ने पंचायतवार एससी (SC) और एसटी (ST) के आरक्षण से संबंधित सूचनाओं को भी गलत बताया है। आयोग का कहना है कि पंचायतवार जनसंख्या के स्पष्ट और पूर्ण आंकड़े अब तक प्राप्त नहीं हुए हैं, जिसके बिना अंतिम रिपोर्ट तैयार करना नामुमकिन है।
क्या बढ़ेगा आयोग का कार्यकाल?
अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि जब आयोग के पास अभी तक सही सूचना ही नहीं पहुंची है, तो वह 31 मार्च की समय सीमा तक सरकार को अपनी रिपोर्ट कैसे सौंपेगा? जानकारों का मानना है कि आयोग समय की कमी का हवाला देकर एक बार फिर कार्यकाल बढ़ाने की मांग कर सकता है, जिससे पंचायत चुनाव की तारीखें आगे खिसकना लगभग तय माना जा रहा है।
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