भीलवाड़ा। जिले में टीबी उन्मूलन अभियान को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से जिला क्षय निवारण केन्द्र में “एसीएफ (Active Case Finding) प्लानिंग कम ट्रेनिंग“ की समीक्षा बैठक व कार्यशाला का आयोजन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सी.पी. गोस्वामी की अध्यक्षता में किया गया। समीक्षा बैठक के दौरान सीएमएचओ ने एसीएफ हाउस-टु-हाउस सर्वे में सक्रिय केसों की पहचान कर उपचार के निर्देश दिये।
बैठक में सीएमएचओ डॉ. सीपी गोस्वामी ने बताया कि टीबी उन्मूलन की दिशा में टीबी मुक्त भारत अभियान” के तहत जिले में 25 जून से 11 जुलाई 2025 तक चलाए जा रहे हाउस-टु-हाउस एक्टिव केस फाइंडिंग (एसीएफ) सर्वे के दौरान शहर एवं ग्रामीण इलाकों में टीबी के एक्टिव रोगियों की पहचान कर उन्हें शीघ्र उपचार प्रदान करने के निर्देश चिकित्सा अधिकारियों व फिल्ड कार्मिकों को दिए, जिससे कि जिले मे टीबी संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ा जा सके।
बैठक में सीएमएचओ ने अब तक हुए कार्यों की जानकारी लेते हुए सुधारात्मक दिशा-निर्देश चिकित्सा अधिकारियों व कार्मिकों को जारी किए। उन्होंने कहा कि टीबी एक जटिल लेकिन पूर्णतः उपचार योग्य बीमारी है, जिसे जनभागीदारी, समय पर पहचान और गुणवत्तापूर्ण उपचार से नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने एसीएफ गतिविधियों को प्राथमिकता देते हुए जिले में घर-घर संपर्क कर संभावित मरीजों की पहचान, स्क्रीनिंग व जांच की कार्ययोजना को सुदृढ़ करने पर बल दिया।
क्षय उन्मूलन को लेकर कार्यशाला आयोजित-
राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु जिला क्षय निवारण केन्द्र एवं ममता हेल्थ इंस्टिट्यूट फॉर मदर एंड चाइल्ड के संयुक्त तत्वावधान में जिला स्तरीय हितधारक सवेंदीकरण कार्यशाला व योजना बैठक का आयोजन किया गया।
कार्यशाला में सीएमएचओ डॉ0 गोस्वामी ने सक्रिय क्षय रोग खोज अभियान ‘‘एसीएफ’’ की रणनीति तय कर टीबी रोगियों की शीघ्र पहचान, निदान और समुचित उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। इस दौरान उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में क्षय रोग खोज, जांच-रेफरल प्रणाली, संबंधित विभागों की सहभागिता और सामुदायिक भागीदारी पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को एक्टिव केस फाइंडिंग के तहत फील्ड पर सर्वे की तकनीक, केस रिपोर्टिंग की प्रक्रिया और निक्षय पोर्टल पर अपलोड करने के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
इस दौरान जिला क्षय रोग नियंत्रण अधिकारी डॉ. प्रदीप कटारिया, ब्लॉक स्तरीय स्वास्थ्य अधिकारी, लैब तकनीशियन, स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों सहित एवं फील्ड स्टाफ ने भाग लिया।
सीएमएचओ ने सभी अधिकारियों को व फील्ड स्टाफ को प्रेरित करते हुए कहा कि टीबी मुक्त जिला बनाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है और इसके लिए समर्पित प्रयासों की आवश्यकता है। इसके लिए उन्होंने चिकित्सा अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक स्तर पर निगरानी एवं फॉलोअप की प्रक्रिया को मजबूत किया जाए, ताकि जिले में टीबी के मामलों की शीघ्र पहचान हो सके और उपचार की निरंतरता बनी रहे। उन्होंने आमजन में जनजागरूकता के लिए प्रचार-प्रसार गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने के भी निर्देश दिए।
