संघ का विजयादशमी उत्सव: घुमंतु समाज की मातृशक्ति ने किया शस्त्र पूजन
भीलवाड़ा । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा अपने शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में स्वामी रामचरण नगर स्थित आदर्श नगर उप बस्ती में विजयादशमी उत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर परंपरा अनुसार शस्त्र पूजन किया गया, जिसे इस बार घुमंतु समाज की मातृशक्ति प्रेम देवी गाडोलिया ने संपन्न किया। कार्यक्रम का आयोजन स्थानीय स्वयंसेवकों द्वारा किया गया जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों की सहभागिता रही।
महानगर संघचालक कैलाश खोईवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि विजयादशमी उत्सव इस बार बस्तियों के अनुसार आयोजित किए जा रहे हैं ताकि संघ का कार्य समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचे और सज्जन शक्ति को एकत्र कर राष्ट्र को परम वैभव की ओर अग्रसर किया जा सके।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हरिशंकर पारीक रहे, वहीं मुख्य वक्ता के रूप में चित्तौड़ प्रांत के सह प्रांत प्रचारक धर्मेंद्र सिंह ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि संघ का मूल उद्देश्य समाज को संगठित करना है और ऐसे नागरिकों का निर्माण करना है जो राष्ट्र के प्रति समर्पित और चरित्रवान हों।
धर्मेंद्र सिंह ने संघ के संस्थापक डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन और विचारों का उल्लेख करते हुए बताया कि किस प्रकार डॉक्टर जी ने स्वतंत्रता संग्राम के साथ-साथ समाज के संगठन की आवश्यकता को महसूस किया। उन्होंने 1925 में विजयादशमी के दिन संघ की स्थापना इसी उद्देश्य से की कि समाज जाति, पंथ, भाषा और क्षेत्रीय भेदभाव से ऊपर उठकर एकात्म रूप में संगठित हो सके।
उन्होंने कहा कि संघ की शाखाएं केवल खेल और व्यायाम का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे राष्ट्र निर्माण के लिए चरित्र निर्माण की प्रयोगशाला हैं। शाखाओं में अनुशासन, सेवा, त्याग और नेतृत्व के गुणों का विकास होता है, जो आज के सामाजिक, सांस्कृतिक और नैतिक उत्थान का आधार है।
कार्यक्रम में उन्होंने पंच परिवर्तन की अवधारणा पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि समाज के हर वर्ग को इन पांच परिवर्तनों को अपने जीवन में अपनाना चाहिए—सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, स्व का बोध, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्तव्य का पालन। इन मूल्यों के समावेश से ही भारत को एक परम वैभवशाली और विश्वगुरु राष्ट्र के रूप में स्थापित किया जा सकता है।
धर्मेंद्र सिंह ने डॉक्टर हेडगेवार के विचारों को उद्धृत करते हुए कहा, “देश की दशा सुधारनी है तो समाज को संगठित करना ही होगा।” उन्होंने यह भी कहा कि आज संघ का कार्य सेवा, समरसता और सामाजिक विकास के प्रत्येक क्षेत्र में दिखाई देता है और यह संघ की सतत साधना का परिणाम है।
इस आयोजन में बड़ी संख्या में मातृशक्ति, युवा स्वयंसेवक, बालक-बालिकाएँ तथा समाज के गणमान्यजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रगीत के साथ विजयादशमी उत्सव का समापन हुआ।
