जीवन में कितने भी कष्ट आएं, भक्ति और भजन नहीं छोड़ने चाहिए: संत दिग्विजय रामजी
भीलवाड़ा । शहर के रोडवेज बस स्टैंड के समीप अग्रवाल उत्सव भवन में स्वर्गीय गीतादेवी तोषनीवाल चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में चल रहे सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान सप्ताह के दूसरे दिन भक्तिभाव का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। व्यास पीठ से कथा वाचन करते हुए रामद्वारा चित्तौड़गढ़ के संत दिग्विजय रामजी महाराज ने कहा कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयां आएं, भक्ति और भजन का मार्ग कभी नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रभु मनुष्य की परीक्षा लेते हैं और संकट के समय भी यदि श्रद्धा बनी रहे तो वही जीवन का सबसे बड़ा आधार बनती है।
संत दिग्विजय रामजी ने कहा कि सुख को हरि की कृपा और दुख को हरि की इच्छा मानकर स्वीकार करने से मनुष्य का जीवन कल्याणकारी बनता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि मंदिर में सांसारिक वस्तुएं मांगने के बजाय प्रभु को हृदय में बसाने की प्रार्थना करें। दूसरे दिन कपिल देवहूति संवाद, सती चरित्र और ध्रुव चरित्र प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया गया। संत ने यह भी कहा कि वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करने से भविष्य स्वतः संवर जाता है और धर्म का आचरण ही आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।
कथा स्थल पर अनेक संत महात्माओं का सानिध्य भी प्राप्त हुआ। मंच पर उपस्थित संतों ने व्यास पीठ से प्रवचन कर रहे संत दिग्विजय रामजी का अभिनंदन किया और उन्होंने भी सभी संतों का स्वागत किया। संतों ने कहा कि हरिकथा श्रवण से भक्ति का बीजारोपण होता है और संतों की संगति से जीवन दिशा प्राप्त करता है।
भजनों के दौरान पांडाल में श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे। जैसे ही भजन गूंजे, वृद्धों से लेकर युवाओं तक सभी भक्ति रस में सराबोर नजर आए। राम भक्त शबरी से जुड़े भजन सहित अनेक पदों पर सैकड़ों श्रद्धालु मंच के सामने नृत्य करते दिखाई दिए। दूसरे दिन कथा विश्राम पर आरती तोषनीवाल परिवार और श्रद्धालुओं ने की। आयोजन में बताया गया कि प्रतिदिन दोपहर से शाम तक कथा का वाचन हो रहा है और आगामी दिनों में विभिन्न प्रसंगों के साथ विशेष आयोजनों का क्रम जारी रहेगा।
कथा महोत्सव परिसर में चल रहे पंच कुंडीय श्री विष्णु महायज्ञ में भी श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ में प्रतिदिन अलग अलग यजमान आहुतियां देकर सुख शांति और कल्याण की कामना कर रहे हैं।
