भीलवाड़ा में 'गुटखा माफिया' की मनमानी: तानसेन और सिग्नेचर पर अघोषित 'पाबंदी', बढ़े दामों के बाद भी बाजार से गायब

Update: 2026-02-13 11:33 GMT


भीलवाड़ा पिंकू खोतानी। वस्त्रनगरी में पान मसाला और तंबाकू के शौकीनों के लिए बुरी खबर है। शहर के बाजारों में गुटखा और पान मसाले की कृत्रिम किल्लत पैदा कर दी गई है। आलम यह है कि जेब ढीली करने के बावजूद शौकीनों को अपना पसंदीदा ब्रांड नहीं मिल पा रहा है। माना जा रहा है कि बड़े होलसेलर्स और दुकानदारों ने भारी मुनाफा कमाने के चक्कर में पुराने स्टॉक को दबा लिया है।

दामों में भारी उछाल, फिर भी किल्लत

सूत्रों के अनुसार, भीलवाड़ा के बाजार में पिछले कुछ दिनों से कीमतों में आग लगी हुई है। आंकड़ों पर नजर डालें तो मुनाफाखोरी का खेल साफ समझ आता है:



होलसेलर्स के गोदामों में 'कैद' हुआ माल

जानकार सूत्रों का कहना है कि यह पूरी तरह से एक 'सिंडिकेट' का खेल है। जैसे ही कीमतों में बढ़ोतरी की आहट हुई, दुकानदारों और बड़े सप्लायर्स ने पुराने माल की बिक्री पर अघोषित पाबंदी लगा दी। मकसद साफ है—पुराने दाम पर खरीदा हुआ माल नई और बढ़ी हुई दरों पर बेचकर मोटा मुनाफा पीटना। ग्राहक दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन दुकानदार 'स्टॉक नहीं है' का बोर्ड लगाकर बैठे हैं।

शौकीनों की जेब पर 'डाका'

भीलवाड़ा के पान मसाला प्रेमी इस कालाबाजारी से बेहद परेशान हैं। ₹280 और ₹380 देने को तैयार होने के बाद भी माल उपलब्ध न होना, प्रशासन की सुस्त व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करता है। क्या जिम्मेदार विभाग इन जमाखोरों के गोदामों की सुध लेगा, या जनता यूं ही लुटती रहेगी?

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