राशन वितरण की नई व्यवस्था बनी सिरदर्द, बुजुर्गों और दिव्यांगों की बढ़ी मुश्किलें

Update: 2026-03-06 06:50 GMT

बागोर बद्रीचंद । क्षेत्र में सरकारी गेहूं वितरण की नई प्रणाली लागू होने के बाद उपभोक्ताओं, विशेषकर बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए राशन लेना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं रह गया है। सरकार द्वारा लागू किए गए नए नियमों के तहत अब पीओएस (पोष) मशीन को सीधे इलेक्ट्रॉनिक धर्मकांटे से जोड़ दिया गया है, जिससे राशन वितरण की प्रक्रिया और अधिक जटिल हो गई है।

मशीन और धर्मकांटे के 'अजीब' कनेक्शन से बढ़ी परेशानी

शुक्रवार को कस्बे में राशन डीलरों और उपभोक्ताओं के बीच नई व्यवस्था को लेकर खासी चर्चा और परेशानी देखी गई। अब नियम यह है कि उपभोक्ता को दुकान पर आकर पहले अंगूठा (फिंगरप्रिंट) लगाना होता है, उसके बाद धर्मकांटे पर राशन का वजन होने पर ही मशीन से पर्ची निकलती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह तकनीक पारदर्शिता के नाम पर उन लोगों के लिए मुसीबत बन गई है जो चलने-फिरने में असमर्थ हैं।

दहलीज लांघते ही मशीन हो जाती है बेअसर

सबसे बड़ी समस्या उन बुजुर्गों, दिव्यांगों और नेत्रहीन उपभोक्ताओं के साथ आ रही है जो राशन की दुकान तक नहीं पहुंच सकते। ग्रामीणों का आरोप है कि जैसे ही पीओएस मशीन को दुकान की तय सीमा या दहलीज से बाहर ले जाने की कोशिश की जाती है, वह काम करना बंद कर देती है। ऐसे में जो उपभोक्ता बिस्तर पर हैं या घर से बाहर नहीं निकल सकते, उन्हें सरकारी गेहूं से वंचित होना पड़ रहा है।

राशन डीलरों ने जताई चिंता, सुधार की मांग

क्षेत्र के राशन डीलरों का कहना है कि सरकार के इस नए सिस्टम से केवल उपभोक्ता ही नहीं, बल्कि डीलर भी परेशान हैं। सर्वर की समस्या और मशीन की सीमित रेंज के कारण वितरण कार्य घंटों पिछड़ रहा है। ग्रामीणों और डीलरों ने प्रशासन से मांग की है कि इस व्यवस्था में जल्द से जल्द सुधार किया जाए और असमर्थ लोगों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था (जैसे घर पर राशन पहुंचाना या नॉमिनी सिस्टम) को प्रभावी बनाया जाए ताकि पारदर्शिता के साथ मानवीय दृष्टिकोण भी बना रहे।

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