मानवता की मिसाल: फरिश्ता बनकर पहुंचे दो मुस्लिम युवक, रक्तदान कर बचाई जान
भीलवाड़ा। चिकित्सा जगत में अक्सर कहा जाता है कि रक्त का कोई धर्म नहीं होता, और इसी बात को भीलवाड़ा के दो युवाओं ने चरितार्थ कर दिखाया है। शहर के महात्मा गांधी चिकित्सालय में भर्ती एक महिला के लिए दो मुस्लिम युवकों ने समय पर रक्तदान कर मानवता की एक अनूठी मिसाल पेश की है।
तीन यूनिट ब्लड की थी दरकार
प्राप्त जानकारी के अनुसार, हुरड़ा निवासी फरीदा बेगम की तबीयत अचानक खराब होने पर परिजनों ने उन्हें महात्मा गांधी हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। चिकित्सकों ने जांच के बाद महिला के शरीर में रक्त की भारी कमी बताई और आपातकालीन स्थिति में तीन यूनिट ब्लड की व्यवस्था करने को कहा। परेशान परिजन रक्त के लिए प्रयासरत थे।
सोशल मीडिया ग्रुप के जरिए मिली सूचना
महिला को रक्त की आवश्यकता की जानकारी सोशल मीडिया ग्रुप के माध्यम से गुलअली नगरी निवासी मोहम्मद खलील सोरगर और लुकमान भाई को मिली। सूचना मिलते ही दोनों युवाओं ने बिना समय गंवाए अस्पताल पहुंचने का निर्णय लिया। दोनों युवा तुरंत महात्मा गांधी हॉस्पिटल पहुंचे और स्वेच्छा से रक्तदान किया। युवाओं की इस तत्परता से समय पर रक्त मिल सका और महिला की जान बच गई।
रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं
रक्तदान के पश्चात मोहम्मद खलील और लुकमान ने समाज को एक सकारात्मक संदेश देते हुए कहा कि रक्तदान एक महान कार्य है और हमारे छोटे से प्रयास से किसी का जीवन बच सकता है। उन्होंने यह भी साबित किया कि धर्म और मानवता एक-दूसरे से अलग नहीं हैं, बल्कि संकट के समय एक-दूसरे की मदद करना ही सबसे बड़ा धर्म है।
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