बड़ी लापरवाही; नगर निगम क्षेत्र के 25 हजार मतदाता अब चुनेंगे 'गांव की सरकार'
भीलवाड़ा। प्रशासन की एक तकनीकी चूक ने भीलवाड़ा शहर के हजारों लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों को उलझा कर रख दिया है। शहर की सीमा के भीतर रहने वाले करीब 25 हजार मतदाता अब शहर की बजाय मांडल विधानसभा (ग्रामीण क्षेत्र) के लिए मतदान करेंगे। यह विसंगति पिछले चुनाव के समय शुरू हुई थी, जिसे सुधारने के बजाय इस बार फिर दोहराया जा रहा है।
शहर की सुविधाएं, पर वोट 'गांव' में
भीलवाड़ा नगर निगम क्षेत्र में आने वाली करीब 40 निजी कॉलोनियां भौगोलिक और प्रशासनिक रूप से भीलवाड़ा विधानसभा का हिस्सा हैं। यहाँ सड़कों, नालियों और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास नगर निगम कर रहा है, लेकिन चुनाव विभाग की मैपिंग ने इन्हें 'मांडल' का हिस्सा बना दिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे शहर की सुविधाओं का लाभ लेते हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक भागीदारी ग्रामीण क्षेत्र से जोड़ दी गई है।
प्रभावित होने वाली मुख्य कॉलोनियां
मैपिंग की इस गलती की चपेट में शहर की कई पॉश और प्रमुख बस्तियां आई हैं:
प्रमुख क्षेत्र: बालाजी अपार्टमेंट, उगम विहार, हिमांशु नगर, कंचन देवी कॉलेज क्षेत्र, संगम विहार, आस्था रेजिडेंसी।
अन्य कॉलोनियां: शारदा एवरग्रीन, ब्रजभूमि, स्वास्तिक एन्क्लेव, संस्कृति विहार, हनुमान नगर, शांता विहार, कनक विहार, श्रीनाथ कॉलोनी, ओस्तवाल एम्पायर, केशव नगर, गणपति नगर, और विनायक सिटी सहित 40 अन्य क्षेत्र।
बूथों के फेरबदल से बढ़ी दूरी की मुसीबत
केवल विधानसभा ही नहीं, बल्कि मतदान केंद्रों (बूथों) के आवंटन में भी भारी विसंगति देखी गई है:
भाग संख्या 1: 1080 मतदाताओं में से करीब 194 लोगों को 1.5 से 2 किमी दूर भाग संख्या 15 और 16 में शिफ्ट कर दिया गया।
भाग संख्या 2: यहाँ के 100 मतदाताओं को भी भाग संख्या 15 में भेज दिया गया है।
भाग संख्या 124: यहाँ के क्रम संख्या 611 से 711 तक के मतदाताओं को भाग संख्या 126 में जोड़ा गया है।
