भीलवाड़ा में शरद पूर्णिमा उत्सव की धूम: चांदनी रात में खीर का लगा भोग,प्रसाद के लिए मंदिरों में उमड़ी श्रद्धा की भीड़
भीलवाड़ा हलचल।
चांदनी रात, भक्तों की भीड़ और खीर की मिठास से भीलवाड़ा सोमवार को भक्ति के रंग में रंग गया। शरद पूर्णिमा उत्सव पूरे शहर में बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। मंदिरों में घंटियों की गूंज, आरती की ज्योति और चंद्रमा की रजतमयी किरणों के बीच भक्तों ने खीर का भोग लगाकर अमृत तुल्य प्रसाद का आनंद लिया।
शहर के प्रमुख मंदिरों — संकटमोचन हनुमान मंदिर, दुदाधारी मंदिर, हठीले हनुमान मंदिर और बालाजी मंदिर — में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। दिनभर तैयारियां चलती रहीं और रात होते ही मंदिरों के प्रांगण में श्रद्धा का सागर उमड़ पड़ा।
🛕 संकटमोचन हनुमान मंदिर: 301 लीटर दूध से बनी खीर का भोग
संकटमोचन मंदिर पर इस वर्ष शरद पूर्णिमा का आयोजन विशेष रहा। मंदिर के महंत बाबूगिरी के सानिध्य में हनुमानजी का आकर्षक श्रृंगार किया गया। मध्यरात्रि में विशेष आरती के बाद 301 लीटर दूध से बनी खीर का भोग भगवान को लगाया गया।
चंद्रमा की ठंडी चांदनी में रखी गई इस खीर को बाद में भक्तों में प्रसाद के रूप में वितरित किया गया। मंदिर परिसर में “जय श्रीराम” और “हनुमानजी महाराज की जय” के जयकारों से वातावरण गूंज उठा।
बालाजी मंदिर: 501 लीटर दूध से बना महाभोग और भजनों की गूंज
पंडित आशुतोष शर्मा ने बताया कि बालाजी मंदिर में सोमवार को क्षीरपान उत्सव बड़े भव्य रूप में मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत श्रीराम दरबार के नयनाभिराम श्रृंगार और भजनों की प्रस्तुति से हुई।
रात्रि 12 बजे चंद्रमा की किरणों में रखी गई 501 लीटर दूध से बनी खीर का महाभोग बालाजी को अर्पित किया गया। इसके बाद आरती कर भक्तों में प्रसाद वितरण किया गया।
पूरे आयोजन की तैयारी में सुनील सुराणा, गोपाल अग्रवाल, अनिल अग्रवाल और संजय चोरड़िया सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु सक्रिय रहे।
🌙 हठीला हनुमान मंदिर: 501 किलो खीर का भोग, चांदनी रात में विशेष पूजा
रेलवे स्टेशन स्थित हठीला हनुमान मंदिर में भी शरद पूर्णिमा का उत्सव अद्भुत रहा। पंडित बालकिशन शर्मा ने बताया कि बालाजी को रजत चोला पहनाकर मध्यरात्रि में विशेष आरती की गई।
इस अवसर पर 501 किलो खीर का भोग लगाया गया और भक्तों में प्रसाद वितरण हुआ। मंदिर परिसर में भक्तों ने देर रात तक भक्ति गीतों के साथ उल्लास का वातावरण बनाए रखा।
🌿 खांखरावाला देव स्थल: 1800 किलो दूध और 108 जड़ी-बूटियों से बनी औषधीय खीर
खांखरावाला देव स्थल पर इस वर्ष का आयोजन अपने आप में विशेष रहा। यहां 1800 किलो दूध से खीर तैयार की गई, जिसमें 108 प्रकार की औषधीय जड़ी-बूटियां मिलाई गईं।
रात को आरती के बाद यह खीर श्वांस रोगियों को औषधीय प्रसाद के रूप में दी गई। इस दौरान देशभर से आए श्रद्धालु और रोगी शामिल हुए।
सुविधा के लिए पंडाल बनाए गए और पंजीकरण की ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों व्यवस्थाएं की गईं।
🌸 निंबार्क आश्रम: 1100 लीटर दूध से बनी खीर और 82 औषधीय जड़ी-बूटियों की परंपरा
गांधीनगर स्थित निंबार्क आश्रम में महंत मोहनशरण शास्त्री के सानिध्य में आयोजित इस पारंपरिक आयोजन में इस बार 2 हजार रोगियों को खीर प्रसाद के साथ 82 जड़ी-बूटियों से तैयार विशेष औषधि दी गई।
यह परंपरा आश्रम में पिछले 15 वर्षों से निरंतर निभाई जा रही है। भक्तों का कहना है कि यह औषधीय खीर श्वांस रोगों में बेहद लाभदायक मानी जाती है।
🌕 चांदनी रात में भक्ति का उल्लास
रात के अंतिम पहर में जब चंद्रमा आकाश में पूर्ण तेज से दमक रहा था, तब मंदिरों में आरती की घंटियां गूंज रही थीं।
हर ओर खीर की खुशबू, भक्ति की गूंज और श्रद्धा का सागर फैला हुआ था। लोगों ने कहा — “शरद पूर्णिमा की यह खीर सिर्फ स्वाद नहीं, श्रद्धा और आस्था का अमृत है।”
