भीलवाड़ा की डॉ. निर्मला शर्मा को होम्योपैथी में पीएचडी की उपाधि: चिकित्सा जगत में गौरव
भीलवाड़ा । राजस्थान के भीलवाड़ा जिले की प्रसिद्ध होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. निर्मला शर्मा ने चिकित्सा और शिक्षा के क्षेत्र में एक विशिष्ट उपलब्धि हासिल की है। डॉ. शर्मा को उनके उत्कृष्ट शोध कार्य के लिए पीएचडी (Ph.D.) की उपाधि से सम्मानित किया गया है। यह सफलता न केवल उनके व्यक्तिगत करियर का मील का पत्थर है, बल्कि क्षेत्र के होम्योपैथी चिकित्सा जगत के लिए भी बड़े गर्व की बात है।
सहायक आचार्य के पद पर कार्यरत
डॉ. निर्मला शर्मा वर्तमान में यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ होम्योपैथी, केकड़ी में सहायक आचार्य (Assistant Professor) के रूप में अपनी सेवाएँ दे रही हैं। शैक्षणिक योग्यता में वे BHMS और MD (Medicine) की डिग्री धारक हैं। इसके अतिरिक्त, वे भीलवाड़ा स्थित 'श्रृंगी होम्योपैथिक क्लिनिक' के माध्यम से आमजन को निरंतर चिकित्सकीय परामर्श और उपचार उपलब्ध करवा रही हैं।
डायबिटीज पर शोध: सेफालैन्ड्रा इंडिका की प्रभावकारिता
डॉ. शर्मा का शोध कार्य आधुनिक समय की गंभीर बीमारी "डायबिटीज मेलिटस टाइप-2" पर केंद्रित रहा। उन्होंने डॉ. अंजलि ठाकुर के कुशल मार्गदर्शन में अपना शोध “डायबिटीज मेलिटस टाइप-2 में होम्योपैथिक औषधि सेफालैन्ड्रा इंडिका (Cephalandra indica Q) की प्रभावकारिता” विषय पर पूर्ण किया। इस वैज्ञानिक विश्लेषण में टाइप-2 मधुमेह के प्रबंधन में होम्योपैथी की उपयोगिता को प्रभावी ढंग से सिद्ध किया गया है, जिसकी चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा काफी सराहना की जा रही है।
सफलता का श्रेय अपनों को
अपनी इस शैक्षणिक उपलब्धि पर डॉ. निर्मला शर्मा ने हर्ष व्यक्त करते हुए इसका श्रेय अपनी दादी श्रीमती रुकमा देवी, दादा श्री भैरू लाल, माता श्रीमती देवकी देवी और पिता श्री कैलाश चंद्र शर्मा (RAS) को दिया है। साथ ही उन्होंने पति डॉ. राघव शर्मा, भाई हिमांशु जोशी (RAS), बहन गुर्वाक्षी, ससुर डॉ. कैलाश चंद्र शर्मा व सास श्रीमती स्वर्णा देवी सहित समस्त मित्रों और शुभचिंतकों के सहयोग व आशीर्वाद के प्रति कृतज्ञता प्रकट की। यह उपलब्धि क्षेत्र के युवा शोधार्थियों के लिए प्रेरणा का एक नया स्रोत बनकर उभरी है।