अद्भुत संयोग! कोटड़ी श्याम की जलझूलनी यात्रा में इंद्रदेव ने बरसाए अमृत:: जलविहार के बाद आज लौटेंगे ठाकुर जी निज धाम

Update: 2025-09-03 12:37 GMT

   

भीलवाड़ा हलचल  भीलवाड़ा हलचल जिले के कोटड़ी कस्बे में आज मेवाड़ क्षेत्र के ऐतिहासिक भगवान श्रीचारभुजानाथ ने हजारों भक्तों के साथ निज धाम छोड़कर भक्तों के कंधों पर रजत रेवाड़ी में बिराजमान होकर जलझूलन करने निकले इससे मोके पर भगवान के बाल विग्रह का स्पर्श करने मानो इंद्रदेव भी धरती पर उतर आए हों। दिनभर मेघ झूम-झूमकर बरसे और श्रद्धालुओं के उत्साह को दुगुना कर दिया। वहीं शाम ढ़लने के साथ ही धर्माऊ तालाब पर भगवान के साथ भक्तों ने भी डुबकी लगा कर अपने को धन्य महसूस किया।जलझुलन के बाद अब  गुरुवार को सुबह तक चारभुजानाथ करीब 18 घंटे नगर भ्रमण कर सुबह  निज धाम में लौटेंगे ।इस ऐतिहासिक पल व दिव्य शोभायात्रा के लिए हजारों भक्त कोटड़ी श्याम पहुंचे . मंगला आरती के साथ उत्सव का श्रीगणेश हुआ, और भक्तों की भीड़ ने कोटड़ी की गलियों को भक्ति के रंग और गुलाल और  और जयकारों से सराबोर हो उठीं।

चारभुजा नाथ को जल विहार  फोटो अनिता


 


 जैसे ही दोपहर 3:15 बजे का समय हुआ, कोटड़ी श्याम ने किसान का वेश धारण किया और चांदी के भव्य रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकले।ठीक इसी समय, जैसा कि भक्तों ने अनुभव किया, बारिश की रिमझिम फुहारें शुरू हो गईं। यह बारिश नहीं, बल्कि मानो इंद्रदेव द्वारा किया गया एक पवित्र अभिषेक था। हर तरफ गुलाल उड़ रही थी और बारिश की बूंदें उस गुलाल को भक्तों के चेहरे पर और भी रंगीन बना रही थीं। इस अद्भुत संयोग ने भक्तों के हृदय में भक्ति का एक नया संचार कर दिया। श्याम की जय" के जयघोष से आकाश गूंज उठा। हजारों भक्त अपने इष्टदेव की एक झलक पाने को बेताब दिखे। 



गलियों में पैर रखने की जगह नहीं थी, फिर भी भक्तों का उत्साह कम न हुआ। ढोल-नगाड़ों की थाप, गुलाल की उड़ान और भक्ति भजनों की स्वरलहरियों ने माहौल को और रंगीन बना दिया।भक्तों ने   बाबा को कंधों पर उठाकर नगर भ्रमण करवाया, जिसमें युवा, बुजुर्ग और बच्चे सभी शामिल थे। ध्वजाओं के साथ नाचते-गाते भक्तों का उत्साह देखते ही बनता था। बेवाण (प्रसाद) लेने की होड़ में भक्त अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की उम्मीद लिए जुटे रहे। यह उत्सव न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बन गया। 



 सांसद-विधायक ने भजन-कीर्तन किए

सांसद दामोदर अग्रवाल और विधायक जलझूलनी महोत्सव में शामिल हुए। जहां सांसद-विधायक ने भजन-कीर्तन किए। इस दौरान दोनों ने ढोलक और मंजीरा बजाया और भजनों पर भी जमकर झूमे

दूसरी और कल रात से ही मंदिर पहुंचे हजारो भक्तो ने बाबा के लम्बी कतारों में लगे कर दर्शन किये और प्रसाद पाया रात एक बजे बाद से आरती के बाद प्रसाद वितरण शरू हुआ ट्रस्ट के सुर्दशन गाड़ोदिया ने बताया की सुबह तक प्रसाद का वितरण किया गया Full ViewFull View

 रजत रेवाड़ी में सवार ठाकुरजी

श्रीचारभुजानाथ के इस ऐतिहासिक एवं धार्मिक पर्व जलझूलनी एकादशी पर सुबह कोटड़ी श्याम का विद्वान पंडितों के षोडशोपचार, मंगलाचरण के साथ दुग्धाभिषेक एवं त्रिवेणीधाम से कावड़ में लाए जल से अभिषेक किया गया, इसके बाद भगवान को स्वर्णाभूषण से मंडित पोषाक धारण करा महाआरती करके किसान का रूप धारण करवाया गया।

जलविहार 

फोटो अभिनन्दन


 


डीजे, ढ़ोल, भजन कलाकार के द्वारा गाए जाने वाले भजनों व बाजों की थाप पर नाचते-गाते दिन ढ़लने के साथ ही धर्माऊ तालाब पर पंहुचे। पुष्प वर्षा ओर गुलाल को उड़ता देख वृन्दावन व गोकुल की होली भी फीकी लग रही थी। सरोवर पर पंहुचने के साथ ही सभी बेवाण एक-एक कर भगवान को सोनी घाट पर ले गए। जहां विराजमान कराने के बाद एक-एक कर श्रद्धा से हाथीघोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की। श्रीचारभुजानाथ के जयकारे के साथ प्रभू संग तालाब में डुबकी लगाते हुए नहलाया गया। सभी भगवान की सामूहिक आरती के बाद भक्तों के कंधों पर सवार हो कर शिवालय चौक स्थित शिव मन्दिर के सन्मुख अर्द्ध चंन्द्राकार में खड़े हो सामूहिक आरती की गई। भगवान चारभुजानाथ भक्तों के कंधों पर सवार हो कर रातभर नगर भ्रमण करते हुए गुरूवार सवेरे 9 बजें 18 घण्टे बाद वापस उसी रास्ते से मन्दिर पंहुच अपनी सीट पर विराजमान होंगे। इसके बाद सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा। मेले में श्रीचारभुजा मन्दिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सुदर्शन गाड़ोदिया, सचिव श्यामसुन्दर चेचाणी, प्रशासनिक एवं कानून व्यवस्थाओं के लिए उपखण्ड अधिकारी तानिया रिणवा, एएसपी राजेश आर्य, उपाधीक्षक रविन्द्र कुमार, तहसीलदार रामकिशोर मीणा, थाना प्रभारी महावीर मीणा ने व्यवस्थाओं को चाकचोबन्द रखा। मेले में भीड़ को लेकर जिले के अनेक थानो से थाना प्रभारी व जाब्ता मंगवाया व अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा।

18 घंटे तक रहेंगे भ्रमण पर



 

तीसरे पहर के शुभ मुहूर्त में भगवान चारभुजानाथ की अनुमति मिलते ही पुजारी व भक्त निज मूर्त ठाकुरजी को रजत रेवाड़ी में बिराजमान करवाया। कोटड़ी श्याम का सिंहासन इस दौरान 18 घंटे तक सालिगराम जी संभालते हैं। कस्बे के पटेल द्वारा लाए सूती लाल टूल के कपड़े व दर्जी समाज द्वारा बनाई गई पोशाक को धारण कर ठाकुरजी ने किसान का रूप धरा।उसके बाद भक्तों के कंधों पर सवार होकर जैसे ही ठाकुरजी निज धाम से बाहर निकलते तो दर्शन को आतुर हजारों भक्त पुष्प वर्षा व कोटड़ी श्याम का दीदार करने उमड़ पड़े।

 राम भरत सा मिलन

शोभायात्रा के रूप में बाजार होते हुए कोटड़ी श्याम का बेवाण जैसे ही चौकी मन्दिर पहुंचा  तो चौकी मन्दिर के चारभुजा कोटड़ी श्याम के बड़े भाई दोनों बैवाण का मिलन राम भरत सा मिलन सा नजारा बना। कस्बे के सभी मंदिरों के 11 बेवाण कोटड़ी श्याम के विमान के साथ जलझूलन को रवाना हुए।हजारों भक्त कोटड़ी श्याम के भजनों पर नाचते गाते पवित्र सरोवर के घाट पर पहुंचे उसके बाद भगवान को जल में झूलन कराया गया और इसके बाद महाआरती हुई।


 



घर घर के बाहर पूजा अर्चना

जल झूलन पर कोटड़ी श्याम पूरे दिन कस्बे में भक्तों के कंधे पर सवार रहते हैं,हर घर के बाहर ठाकुर जी की पूजा अर्चना की जाती है, ग्रामीणों ने बेसब्री से ठाकुर जी का इंतजार करते है। पूरी रात कोटड़ी श्याम के भक्त भजनों पर श्याम की मस्ती में झूमते रहते हैं। जगह-जगह आरती की जाती है, अगले दिन अपने निज धाम आकर सिंहासन पर विराजते हैं। भक्तों को दर्शन देते हैं। भक्त भी कोटड़ी श्याम की थकान दूर करने के लिए कई प्रकार के शीतल पेय बनाकर उन्हें रिझाने का प्रयास करते हैं।

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