भीलवाड़ा में श्रमिकों की मांगों को लेकर भारतीय मजदूर संघ ने सौंपा ज्ञापन
भीलवाड़ा। बजट वर्ष 2025-26 में श्रमिकों की मांगों की अनदेखी किए जाने के विरोध में भारतीय मजदूर संघ, राजस्थान के आह्वान पर जिले भर के श्रमिकों की ओर से जिला मुख्यालय भीलवाड़ा पर जिला अधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को ज्ञापन प्रेषित किया गया। ज्ञापन में विभिन्न विभागों से जुड़े कर्मचारियों और श्रमिकों की लंबित मांगों पर प्राथमिकता से निर्णय लेने की मांग की गई है।
ज्ञापन में बताया गया कि बजट पूर्व भारतीय मजदूर संघ से सुझाव आमंत्रित किए गए थे, किंतु बजट घोषणाओं में श्रमिकों की प्रमुख मांगों को शामिल नहीं किया गया। इस पर संघ ने सभी जिलों में एक साथ ज्ञापन सौंपकर सरकार का ध्यान आकृष्ट किया है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय 13 हजार रुपये, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का 7500 रुपये, आंगनबाड़ी सहायिकाओं का 6500 रुपये तथा आशा कार्यकर्ताओं का 6000 रुपये प्रतिमाह किए जाने की मांग दोहराई गई। यह भी मांग की गई कि केंद्र और राज्य सरकार की ओर से देय मानदेय का भुगतान प्रत्येक माह की 1 से 5 तारीख के बीच एक साथ किया जाए। सेवानिवृत्त स्कीम वर्कर्स को 3 लाख रुपये ग्रेच्युटी देने की पूर्व बजट घोषणा को लागू करने की भी मांग की गई।
ठेका कर्मचारियों के संबंध में विद्युत कंपनियों, निगमों और विभागों में कार्यरत श्रमिकों का न्यूनतम वेतन 21 हजार रुपये प्रतिमाह निर्धारित करने, जॉब सुरक्षा, वेतन सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग रखी गई।
राजस्थान रोडवेज के कर्मचारियों के वेतन और पेंशन का नियमित भुगतान सुनिश्चित करने, सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बकाया परिलाभ के भुगतान के लिए स्थायी बजट प्रावधान करने तथा निगम को राज्य सरकार के परिवहन विभाग में समायोजित करने की मांग की गई। नई बसों की खरीद और विधायक कोटे से बस संचालन शुरू करने की भी बात कही गई।
विद्युत विभाग में फ्रेंचाइजी, क्लस्टर, सीएलआरसी, एमबीसी और आईटी जैसे माध्यमों से किए जा रहे निजीकरण पर रोक लगाने तथा ठेका प्रथा समाप्त कर कार्यभार के अनुसार सभी कैडरों में नई भर्ती करने की मांग की गई। अधिमानता के आधार पर नियुक्ति में लिंग भेद से वंचित कर्मचारियों को कनिष्ठ लिपिक और वाणिज्यिक सहायक द्वितीय पद पर समायोजित करने की भी मांग उठाई गई।
शिक्षा विभाग के अंतर्गत लोक जुम्बिश कर्मचारियों को नियमित करने, 1993 सेवा नियमों के तहत सुविधाएं बहाल करने तथा विशेष शिक्षकों को न्यूनतम 30 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय और ग्रीष्मावकाश का भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की गई।
श्रम विभाग से असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए विभिन्न कल्याण बोर्डों का गठन करने, ब्लॉक स्तर पर श्रम अधिकारियों की नियुक्ति करने और रिक्त पदों को शीघ्र भरने की मांग की गई। न्यूनतम मजदूरी दरों को केंद्र सरकार द्वारा 1 अक्टूबर 2024 से लागू दरों के समकक्ष करने की मांग करते हुए अकुशल श्रमिक के लिए 20358 रुपये, अर्धकुशल के लिए 22568 रुपये, कुशल के लिए 24804 रुपये और उच्च कुशल श्रमिक के लिए 26910 रुपये प्रतिमाह निर्धारित करने का प्रस्ताव रखा गया।
भवन एवं अन्य निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल की शुभ शक्ति योजना, आवास सहायता योजना, चिकित्सा पुनर्भरण योजना, हिताधिकारी साइकिल योजना सहित बंद पड़ी योजनाओं को पुनः संचालित करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। साथ ही श्रम भवन निर्माण, मेधावी छात्रवृत्ति योजना और बीमा योजनाओं के पुनर्भरण की मांग की गई।
चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अंतर्गत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में कार्यरत संविदा कार्मिकों को स्थायी करने, स्क्रीनिंग प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करने, ब्लॉक कार्यक्रम अधिकारियों को जिला कार्यक्रम अधिकारी के समकक्ष वेतनमान देने तथा आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय और इंसेंटिव का नियमित भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की गई। एएनएम भर्ती में आशा सहयोगिनियों को पदोन्नति देने का भी आग्रह किया गया।
स्वायत्त शासन विभाग में सफाई कर्मचारियों की भर्ती शीघ्र प्रारंभ करने तथा पथ विक्रेताओं के लिए वेंडिंग जोन बनाकर जीविका संरक्षण और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने हेतु बजट प्रावधान करने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई।
भारतीय मजदूर संघ ने चेतावनी दी है कि यदि बजट में श्रमिक हितों की अनदेखी जारी रही तो प्रदेशव्यापी आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी।
