भीलवाड़ा। बस कोड (AIS 052/119/153) को तत्काल प्रभाव से लागू किए जाने के विरोध में भीलवाड़ा के बस बॉडी निर्माताओं एवं कारीगरों ने अपनी आजीविका पर संकट की आशंका जताते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को ज्ञापन भेजकर राहत की मांग की है।
ज्ञापन में बताया गया कि भीलवाड़ा में बस बॉडी निर्माण का कार्य पिछले 50-60 वर्षों से पांच से अधिक पीढ़ियों द्वारा पारंपरिक कार्यशैली और कौशल के माध्यम से किया जा रहा है। निर्माताओं का कहना है कि वे केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों का पालन करते रहे हैं, लेकिन विभाग द्वारा जारी नई तकनीकी जानकारियां और मानक सीधे व प्रभावी रूप से छोटे निर्माताओं तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
निर्माताओं ने स्पष्ट किया कि वे सरकार द्वारा निर्धारित सभी सुरक्षा मानकों को अपनाने के पक्ष में हैं, परंतु वर्तमान परिस्थितियों में छोटे निर्माताओं पर पहले से ही आर्थिक बोझ है। यदि कठोर नियम अचानक पूरे देश में एक साथ लागू किए गए तो लगभग 30 लाख परिवारों की आजीविका संकट में पड़ सकती है। उन्होंने मांग की है कि इन मुद्दों और आशंकाओं को नीति निर्माताओं तक संवेदनशीलता के साथ पहुंचाया जाए तथा आवश्यक सहायक व्यवस्थाएं प्रदान की जाएं।
निर्माताओं की प्रमुख मांगों में पारंपरिक एवं स्थानीय बस बॉडी निर्माण कार्य को संरक्षित रखने हेतु उपयुक्त रियायतें और लचीले संक्रमणकालीन नियम लागू करना शामिल है, ताकि छोटे कारीगरों और निर्माताओं को समायोजन का पर्याप्त समय मिल सके। इसके अलावा निर्धारित मानकों के अनुपालन हेतु पंजीकरण, शुल्क और परीक्षण प्रक्रियाओं को सरल, सुलभ और किफायती बनाने तथा छोटे निर्माताओं को राहत देने की व्यवस्था की मांग की गई है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि तकनीकी जानकारी, प्रशिक्षण और दिशानिर्देश सीधे स्थानीय निर्माताओं एवं कारीगरों तक पहुंचाने के लिए प्रभावी कार्यक्रम चलाए जाएं, जैसे स्थानीय प्रशिक्षण केंद्र, कार्यशालाएं और आसान भाषा में मार्गदर्शिकाएं। साथ ही विनियमन बढ़ाते समय छोटे निर्माताओं के हितों की रक्षा के लिए प्रभावों का पूर्व मूल्यांकन तथा विवाद निवारण और सहायता तंत्र सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है।
