नारी शक्ति का बढ़ता कदम: घर की चारदीवारी से निकलकर हर क्षेत्र में बनाई पहचान, सोच बदलने की जरूरत
भीलवाड़ा/ । आज की महिला सिर्फ घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं है। उसने अपने बुलंद हौसले, कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर हर क्षेत्र में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। वह न केवल परिवार की जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रही है, बल्कि समाज के सर्वांगीण विकास में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। यह विचार न्यू राइज क्लासेज प्लेसमेंट की डायरेक्टर सुनीता व्यास ने व्यक्त किए।
क्या समाज ने सच में स्वीकार की महिला की आजादी?
सुनीता व्यास ने समाज की वर्तमान स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज भी यह बड़ा प्रश्न बना हुआ है कि क्या एक महिला को अपने जीवन के फैसले लेने का पूरा अधिकार मिल पाया है? उन्होंने कहा कि हालांकि महिलाएं प्रगति कर रही हैं, लेकिन क्या समाज ने वास्तव में उनकी आजादी और सम्मान को खुले मन से स्वीकार किया है? जब तक समाज की पारंपरिक सोच में बदलाव नहीं आएगा, तब तक जमीनी हालात भी पूरी तरह नहीं बदलेंगे।
शक्ति के रूप में पहचान जरूरी
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि आज एक ऐसे समाज के निर्माण की आवश्यकता है जहां महिला को 'कमजोर' नहीं, बल्कि 'शक्ति' के रूप में देखा जाए। महिलाओं के प्रति दृष्टिकोण बदलना ही उनके वास्तविक सशक्तिकरण की दिशा में पहला कदम होगा। न्यू राइज क्लासेज प्लेसमेंट के माध्यम से भी महिलाओं के आत्मविश्वास और करियर को नई दिशा देने के प्रयास किए जा रहे हैं।