ऐतिहासिक पल: 47 वर्षों बाद राजस्थान की धरा पर मुनिश्री योगसागर महाराज का मंगल प्रवेश
बिजौलियां (भीलवाड़ा हलचल)। श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ तपोदय तीर्थ क्षेत्र में मंगलवार को एक आध्यात्मिक उत्सव का वातावरण रहेगा। पूज्य निर्यापक श्रमण मुनिश्री 108 योगसागर महाराज अपने 12 दिगंबर संतों के संघ के साथ इस पावन धरा पर भव्य मंगल प्रवेश करेंगे। राजस्थान की भूमि पर मुनिश्री का यह आगमन पूरे 47 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद हो रहा है, जबकि मेवाड़ क्षेत्र के लिए यह उनका पहला ऐतिहासिक प्रवेश है।
समाज के पंकज जैन ने जानकारी दी कि तीर्थ क्षेत्र पर पहले से ही विराजमान पूज्य मुनिश्री 108 वैराग्य सागर महाराज और 108 सुप्रभ सागर महाराज, ज्येष्ठ निर्यापक मुनिश्री योगसागर महाराज की भव्य आगवानी करेंगे। संतों का यह परस्पर मिलन क्षेत्र के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होगा।
कठोर तप और साधना के 51 वर्ष
मुनिश्री 108 योगसागर महाराज पिछले 51 वर्षों से निरंतर कठोर साधना और तपस्या में लीन हैं। वे दिगंबर जैन संत परंपरा के प्रमुख स्तंभों में से एक हैं और राष्ट्रसंत आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के प्रमुख शिष्यों में गिने जाते हैं। विशेष बात यह है कि वे आचार्य श्री के गृहस्थ जीवन के छोटे भाई भी हैं। उनके साथ चल रहा 12 संतों का संघ निरंतर आध्यात्मिक जागरण और जैन धर्म की प्रभावना का कार्य कर रहा है।
तपोदय तीर्थ पर उमड़ेगा जनसैलाब
भगवान पार्श्वनाथ की केवलज्ञान स्थली माने जाने वाले पार्श्वनाथ तपोदय तीर्थ क्षेत्र में इस मंगल प्रवेश को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं। इस अवसर पर श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ तपोदय तीर्थ क्षेत्र कमेटी बिजौलियां, सकल दिगंबर जैन समाज बिजौलियां सहित पूरे मेवाड़ प्रांत से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस ऐतिहासिक दृश्य के साक्षी बनने पहुंचेंगे।
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