चंद्र ग्रहण और भद्रा के साए में होली! जानें होलिका दहन का सही समय और सूतक काल का असर
भीलवाड़ा। रंगों और खुशियों का त्योहार होली इस बार ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास और चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। इस वर्ष होली पर चंद्र ग्रहण और भद्रा का दुर्लभ साया मंडरा रहा है, जिसके कारण होलिका दहन के समय और धुलंडी के उल्लास पर ग्रहण का असर देखने को मिलेगा।
🌓 होली पर साल का पहला चंद्र ग्रहण
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, 3 मार्च को होली (धुलंडी) वाले दिन साल का पहला चंद्र ग्रहण लगेगा।
ग्रहण का समय: दोपहर 3:20 बजे से शुरू होकर शाम 6:47 बजे तक रहेगा।
सूतक काल: ग्रहण से 9 घंटे पहले यानी सुबह 6:39 बजे से ही सूतक काल शुरू हो जाएगा।
असर: सूतक काल के दौरान पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान और शुभ कार्यों की मनाही रहेगी। शाम 6:46 बजे सूतक समाप्त होने के बाद ही शुद्धिकरण हो सकेगा।
🔥 भद्रा के कारण जल्दी होगा होलिका दहन
2 मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा पर होलिका दहन होगा, लेकिन इस दिन भद्रा का साया रहेगा।
भद्रा का समय: शाम 5:56 बजे से भद्रा शुरू हो जाएगी, जो अगले दिन सुबह 5:00 बजे तक रहेगी।
शुभ मुहूर्त: भद्रा के दोष से बचने के लिए इस बार होलिका दहन शाम 5:56 बजे से पहले ही किया जाएगा। शास्त्रानुसार भद्रा काल में होलिका दहन अशुभ माना जाता है।
⚠️ क्या होगा असर?
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, ग्रहण के दौरान प्रकृति में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। इस बार भारत के कई हिस्सों में यह खंडग्रास चंद्र ग्रहण दिखाई देगा, इसलिए इसका सूतक काल मान्य होगा। ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 27 मिनट की रहेगी।
📅 इस वर्ष लगेंगे कुल 4 ग्रहण
खगोलीय गणना के अनुसार, साल 2026 में कुल चार ग्रहण लगेंगे, जिनमें 2 चंद्र ग्रहण और 2 सूर्य ग्रहण शामिल हैं। होली पर लगने वाला यह पहला ग्रहण खंडग्रास होगा।
