कबराड़िया (राकेश जोशी)। राज्य सरकार द्वारा 10 जुलाई 2024 को पेश किए गए वर्ष 2024-25 के बजट में आसिंद थाने के जाली चौराये पर पुलिस चौकी की स्वीकृति दी गई थी। चौकी के लिए भूमि भी आवंटित हो चुकी है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि आज तक न तो निर्माण कार्य शुरू हुआ और न ही पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। ज़मीन उपलब्ध होने के बावजूद पुलिस चौकी का अस्तित्व केवल सड़क किनारे लगे एक बोर्ड तक ही सीमित है।
जाली चौराहा क्षेत्र लगातार बढ़ते यातायात, सड़क दुर्घटनाओं और आपराधिक गतिविधियों के कारण हमेशा चर्चा में रहता है। यहां से रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन ने अब तक जनता की सुरक्षा को गंभीरता से नहीं लिया। पुलिस चौकी की स्वीकृति के बाद क्षेत्रवासियों को उम्मीद थी कि हालात सुधरेंगे, लेकिन स्थिति आज भी जस की तस बनी हुई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल बोर्ड लगाकर प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली है, जबकि हकीकत यह है कि आमजन आज भी असुरक्षित महसूस कर रहा है। किसी भी आपात स्थिति में लोगों को आसिंद थाने के चक्कर काटने पड़ते हैं, जिससे समय की बर्बादी होती है और कई बार हालात और बिगड़ जाते हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह महज लापरवाही नहीं, बल्कि जनता की सुरक्षा के साथ खुला मज़ाक है। चुनाव और बजट के समय बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन अब वे सभी दावे खोखले साबित हो रहे हैं। सवाल यह उठ रहा है कि जब बजट में स्वीकृति दी गई थी तो फिर निर्माण कार्य और पुलिस तैनाती अब तक क्यों नहीं हुई। आखिरकार फाइलें किसके टेबल पर धूल खा रही हैं, यह भी जांच का विषय बना हुआ है।
क्षेत्रवासियों में अब इस मुद्दे को लेकर आक्रोश खुलकर सामने आने लगा है। वहीं प्रशासन की चुप्पी ने जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
