लाडपुरा: चारभुजानाथ मंदिर में थिरके कदम, ढोल की थाप पर ग्रामीणों ने खेली पारंपरिक गैर
लाडपुरा (शिव लाल जांगिड़)। कस्बे के आराध्य भगवान श्री चारभुजानाथ मंदिर प्रांगण में इन दिनों लोक संस्कृति के रंग बिखर रहे हैं। धुलंडी से शीतला सप्तमी तक चलने वाले पारंपरिक गैर नृत्य के आयोजन में ग्रामीणों ने मनमोहक प्रस्तुतियां देकर समां बांध दिया।
पीढ़ी दर पीढ़ी जीवित है सदियों पुरानी परंपरा
स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, यह गैर नृत्य सदियों पुराना है जिसे ग्रामीण पीढ़ी दर पीढ़ी संजोए हुए हैं। नृत्य के दौरान बुजुर्गों से लेकर बच्चों तक में भारी उत्साह देखा गया, जहां सभी एक साथ कदम से कदम मिलाकर थिरकते नजर आए। यह नृत्य सामूहिक रूप से गोल घेरा बनाकर ढोल, बांकिया और थाली जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर हाथों में डंडे लेकर किया जाता है।
किसानों के मनोरंजन से शुरू हुई थी कला-संस्कृति
लोक मान्यताओं के अनुसार, सैकड़ों वर्ष पहले जब किसान खेती-बाड़ी के कार्यों से मुक्त हो जाते थे, तब मनोरंजन के लिए डंडा लेकर नृत्य की शुरुआत हुई थी। धीरे-धीरे इस नृत्य से लोग जुड़ते गए और आज यह हमारी समृद्ध कला-संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बन गया है।
आयोजन में ये रहे मौजूद
प्रतिदिन शाम 8 बजे से आयोजित हो रही इस गैर में प्रभु धाकड़, नारायण सनाढ्य, सत्तू सुथार, मोती गुर्जर, प्रहलाद सुथार, प्रकाश सुथार, गोपाल माली सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी मौजूद रहकर धर्म और संस्कृति का लाभ ले रहे हैं।
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