वृन्दावन में सजेगा संतों का महाकुंभ: श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के प्रणेता स्वामी वामदेव जी का शताब्दी महोत्सव 28 से, भीलवाड़ा से हजारों भक्त लेंगे भाग
भीलवाड़ा । सनातन धर्म के प्रखर ध्वजवाहक और श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के प्रमुख आधार स्तंभ रहे पूज्यपाद ब्रह्मलीन विरक्त शिरोमणि परमहंस श्री स्वामी वामदेव जी महाराज का जन्म शताब्दी महोत्सव इस बार देशव्यापी स्तर पर मनाया जा रहा है। वृन्दावन के पावन धाम में आगामी 28 फरवरी से 2 मार्च 2026 तक आयोजित होने वाले इस 'शताब्दी आनंद महोत्सव' में भक्ति, शक्ति और सेवा की त्रिवेणी बहेगी।
विशेष आकर्षण: भीलवाड़ा से उमड़ेगा श्रद्धा का सैलाब
स्वामी वामदेव जी महाराज का राजस्थान और विशेषकर वस्त्र नगरी भीलवाड़ा से गहरा आत्मिक जुड़ाव रहा है। महोत्सव को लेकर शहर में भारी उत्साह है और जानकारी के अनुसार भीलवाड़ा से करीब एक हजार से अधिक श्रद्धालु इस ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बनने वृन्दावन कूच करेंगे। भीलवाड़ा की विभिन्न धार्मिक संस्थाओं और भारत विकास परिषद के कार्यकर्ताओं की देखरेख में श्रद्धालु बसों और निजी वाहनों के जरिए इस आध्यात्मिक समागम का हिस्सा बनने पहुंचेंगे। क्षेत्रवासियों के लिए यह गौरव का विषय है कि भीलवाड़ा सेवा कार्यों में भी यहाँ अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
योगी आदित्यनाथ और शीर्ष संतों का होगा जमावड़ा महोत्सव की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री महंत श्री योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। उनके साथ जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज सहित देश के नामी-गिरामी संत-मनीषी अपनी वाणी से धर्म का मर्म समझाएंगे। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ 28 फरवरी को प्रातः 7 बजे पादुका पूजन के साथ होगा।
आंदोलन के 'प्राण' थे स्वामी वामदेव
स्वामी वामदेव जी महाराज का पूरा जीवन राष्ट्र और धर्म के लिए समर्पित रहा। वे श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के 'प्राण' माने जाते थे और उनकी सूक्ष्म दृष्टि व मार्गदर्शन ने आंदोलन को निर्णायक मोड़ दिया था। उन्होंने गौ-रक्षा और हिंदू राष्ट्र के संकल्प को जन-जन तक पहुँचाने के लिए 'अखिल भारतीय संत समिति' की स्थापना की थी।
सेवा और भक्ति का संगम नि:शुल्क सेवा शिविर
श्री भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति (जयपुर) और भारत विकास परिषद (भीलवाड़ा) के सहयोग से विशाल कृत्रिम अंग प्रत्यारोपण शिविर का आयोजन होगा। महोत्सव में 'शांकरभाष्याभिषेक' सहित कई आध्यात्मिक ग्रंथों का विमोचन किया जाएगा। 28 फरवरी की रात हनुमद् आराधना मण्डल, वृन्दावन द्वारा सुंदरकांड पारायण की विशेष प्रस्तुति दी जाएगी।
2 मार्च को विशाल भण्डारा महाप्रसाद के साथ महोत्सव का समापन होगा।
27 फरवरी: रंग भरनी एकादशी पर वृन्दावन धाम परिक्रमा एवं भव्य नाम संकीर्तन। 28 फरवरी: महोत्सव का विधिवत उद्घाटन, दीप प्रज्ज्वलन और वैचारिक सत्र। 01 मार्च: 'सनातन हिंदू संस्कृति संस्कार एवं संरक्षण' विषय पर संतों की विशेष गोष्ठी। 02 मार्च: 'भक्त भक्त भगवंत गुरु चतुरनाम वपु एक' विषय पर चर्चा एवं भण्डारा होगा।
