भीलवाड़ा | नशा कोई भी हो, वह हमारी सेहत के लिए खतरनाक है। आज देश ही नहीं दुनियाभर के युवा बड़ी तेजी से नशे की गिरफ्त में फंसते जा रहे हैं। इससे न सिर्फ उनका करियर और जीवन बर्बाद होता है। नशीली वस्तुओं और पदार्थों के निवारण के लिए 'संयुक्त राष्ट्र महासभा' ने 1987 को यह प्रस्ताव पारित किया था और तभी से हर साल लोगों को नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाले दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से इसे मनाया जाता है।
विश्वास सेवा संस्था नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केन्द्र अध्यक्ष डॉ राजेन्द्र सिंह चौहान ने बताया कि हमारी संस्था द्वारा विगत कई वर्षों से बराड़ा में केन्द्र का संचालन कर रहे हैं।आज अंतराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस के अवसर पर मुख्य अतिथि *विकास शर्मा थायरोकेयर ,जिलाध्यक्ष विप्र फाउण्डेशन युवा प्रकोष्ठ चित्तौड़गढ़* उपाध्यक्ष शोभा लाल धाकड़ कोषाध्यक्ष कालू लाल जी सचिव हरि राम जी उपस्थित हुए।
पधारे हुए अतिथि महोदय ने भर्ती मरीजों को नशे से होने वाली समस्याओं के बारे मे जानकारी दी ओर भविष्य मे दुबारा नशा नहीं करने की सलाह दी। दिग्विजय सिंह चौहान,पुष्पेन्द्र सिंह,काउंसलर ऋतुराज शर्मा आदि उपस्थित थे।
पूरे विश्व में इस दिन विभिन्न समुदायों और संगठन लोगों को नशीली दवाओं के प्रति क्षेत्रीय स्तर लोगों को जागरुक करने के लिए तमाम तरह के कार्यक्रम चलाते हैं। इस दौरान उन्हें नशीले पदार्थों से होने वाले नुकसान और खतरों के बारे में बताया जाता है।
नशा, एक ऐसी बीमारी है जो कि युवा पीढ़ी को लगातार अपनी चपेट में लेकर उसे कई तरह से बीमार कर रही है। शराब, सिगरेट, तम्बाकू एवं ड्रग्स जैसे जहरीले पदार्थों का सेवन कर युवा वर्ग का एक बड़ा हिस्सा नशे का शिकार हो रहा है।
मादक पदार्थों का सेवन - मादक पदार्थों के सेवन में शराब, सिगरेट, ड्रग्स, हेरोइन, गांजा, भांग आदि शामिल हैं।
अन्य - शोधकर्ताओं के अनुसार हर वह चीज जो आपको जिसकी आपको लत लग जाए, नशे की श्रेणी में ही आता है। ऐसी ही कुछ आदतें हैं जिन्हें छोड़ना बेहद मुश्किल होता है जैसे - मादक पदार्थों के अलावा चाय, काफी, वर्तमान समय के नवीन यंत्र जैसे - विडियो गेम्स, स्मार्ट फोन, फेसबुक, इंस्टाग्राम आदि का ज्यादा मात्रा में उपयोग भी नशे की श्रेणी में आते है।
