भीलवाड़ा में साल का दूसरा चंद्रग्रहण: ब्लड मून का नजारा कहीं दिखा कहीं ओझल : खोया-खोया चांद... और छुपा बादल
भीलवाड़ा, राजस्थान में रविवार, 7 सितंबर 2025 की रात 9:57 बजे से साल का दूसरा और आखिरी चंद्रग्रहण (ब्लड मून) देखा गया। यह खगोलीय घटना रात 9:57 बजे शुरू हुई और लगभग 3 घंटे 28 मिनट तक चली। इस दौरान 82 मिनट तक पूर्ण चंद्रग्रहण रहा, जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ गई, जिससे चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया पड़ी और यह लाल-नारंगी रंग का दिखाई दिया, जिसे ब्लड मून के नाम से जाना जाता है। हालांकि, भीलवाड़ा में बादल छाए रहने के कारण यह अद्भुत नजारा स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दिया।
मौसम इन दिनों खराब है। बादलों की लुका-छिपी और चंद्र ग्रहण की चहुं ओर चर्चा के बीच फिल्मी गीत 'खोया-खोया चांद, खुला आसमां' में मानो दूसरा गीत जुड़ गया हो जिसके बोल हैं चांद छुपा बादल में...। बहरहाल ग्रहण लगा और जहां दिख सका वहां लोगों ने देखा। जहां बादलों ने उम्मीदों पर पानी फेरा, वहां लोग मायूस हुई। इसके साथ ही धार्मिक तौर पर भी इसके महत्व पर खूब चर्चा हुई।
सूतक काल और धार्मिक मान्यताएं
हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्रग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। इस बार सूतक काल दोपहर 12:57 बजे से शुरू हुआ था। सूतक काल के दौरान भीलवाड़ा सहित प्रदेश के कई मंदिरों में कपाट बंद रखे गए, और पूजा-अर्चना नहीं की गई। ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों में साफ-सफाई कर , और कपाट दोबारा खोले जायेगे । चंद्रग्रहण पर सूतक लगने के बाद घरों में खाना नहीं बनाया गया। बची हुई खाद्य सामग्री में तुलसी दल डाल दिए गए। सब्जी या फल काटना वर्जित रहा। चंद्रग्रहण पर भोजन करने से पहरेज किया। गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलने दिया गया। सूतक लगने पर सुई और कैंची का प्रयोग वर्जित रहा। चंद्रग्रहण लगने पर कुछ स्थानों पर भजन-कीर्तन होता रहा।
खगोलीय जानकारी
यह चंद्रग्रहण पूर्ण चंद्रग्रहण था, जिसमें चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की छाया (umbra) में प्रवेश कर गया। इस दौरान चंद्रमा का रंग लाल-नारंगी हो गया, क्योंकि पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरने वाली सूर्य की किरणें चंद्रमा पर पड़ती हैं, जिससे यह ब्लड मून का रूप ले लेता है। यह नजारा पूरे भारत में देखा जा सकता था, लेकिन भीलवाड़ा में बादलों की वजह से लोगों को निराशा हाथ लगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया और प्रभाव
भीलवाड़ा के स्थानीय लोगों और खगोल प्रेमियों में इस चंद्रग्रहण को लेकर उत्साह था, लेकिन बादल छाए रहने के कारण कई लोग इसे देखने से वंचित रहे। कुछ लोगों ने टेलीस्कोप और ऑनलाइन लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए इस खगोलीय घटना को देखने की कोशिश की। धार्मिक रूप से, सूतक काल के नियमों का पालन करते हुए कई परिवारों ने भोजन और अन्य गतिविधियों से परहेज किया। मंदिरों में ग्रहण के बाद विशेष पूजा और सफाई का आयोजन किया गया।
यह चंद्रग्रहण 2025 का आखिरी चंद्रग्रहण था, और इसके बाद अगला चंद्रग्रहण भारत में 2026 में दिखाई देगा
