एमपी का 'जामताड़ा' बना शिवपुरी का करेरा: काली कमाई से आई लग्जरी कारें और आलीशान बंगले, 20 ठग गिरफ्तार
मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले का करेरा गांव इन दिनों अपनी समृद्धि के कारण नहीं, बल्कि अपराध के काले साम्राज्य के कारण चर्चा में है। जो लोग कुछ समय पहले तक बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे थे, वे अचानक आलीशान इमारतों और लग्जरी कारों के मालिक बन गए। पुलिस की तफ्तीश में खुलासा हुआ है कि यह समृद्धि मेहनत की नहीं, बल्कि साइबर ठगी और ब्लैकमेलिंग की काली कमाई से आई है।
अश्लीलता के जाल में 'डिजिटल गिरफ्तारी' का खेल
पुलिस अधीक्षक अमन सिंह राठौड़ के नेतृत्व में हुई कार्रवाई में एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश हुआ है जो जामताड़ा की तर्ज पर नेटवर्क चला रहा था।
मोडस ऑपरेंडी: गिरोह महिलाओं के नाम से फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट बनाकर लोगों को अश्लील चैट और वीडियो कॉल के जाल में फंसाता था।
ब्लैकमेलिंग: वीडियो कॉल की रिकॉर्डिंग कर ली जाती थी। इसके बाद आरोपी खुद को पुलिस अधिकारी बताकर पीड़ित को 'चाइल्ड पोर्नोग्राफी' या 'रेप केस' में फंसाने की धमकी देते थे।
डिजिटल अरेस्ट: पीड़ितों के मन में "डिजिटल गिरफ्तारी" का डर पैदा कर केस सेटल करने के नाम पर करोड़ों की वसूली की जाती थी।
पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 'ऑपरेशन मैट्रिक्स'
भोपाल साइबर पुलिस मुख्यालय द्वारा चलाए जा रहे “ऑपरेशन मैट्रिक्स” के तहत शिवपुरी पुलिस ने 9 टीमें गठित कर दबिश दी।
गिरफ्तारी: 20 महिला-पुरुष अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है।
जब्ती: पुलिस ने 1 करोड़ 7 लाख रुपए की संपत्ति जब्त की है, जिसमें 7 लग्जरी कारें, 29 मोबाइल, 16 एटीएम कार्ड और नकद राशि शामिल है।
ऐप्स का जाल: ठगी के लिए HIIU, TOKKI, MIKA और SUGO जैसी कई ऑनलाइन डेटिंग और चैटिंग एप्लीकेशनों का उपयोग किया जा रहा था।
काली कमाई से बदली गांव की तस्वीर
जांच में सामने आया कि ठगी के पैसों से आरोपियों ने गांव में आलीशान मकान बनवाए और महंगी गाड़ियां खरीदीं। भोपाल से मिली 80 संदिग्ध बैंक खातों की सूची ने इस पूरे नेक्सेस का भंडाफोड़ किया। फिलहाल पुलिस इस गिरोह के अन्य संपर्कों और वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों की गहराई से जांच कर रही है।
