नीमच: कभी करोड़पति बनाने वाला लहसुन अब निकाल रहा किसानों के आंसू,

Update: 2026-02-21 17:32 GMT

 

मध्यप्रदेश के नीमच जिले में लहसुन की खेती करने वाले किसानों के लिए यह साल बड़ी मुसीबत लेकर आया है। पिछले साल जिस लहसुन ने किसानों को मालामाल किया था, वही लहसुन अब अपनी लागत निकालने के लिए भी संघर्ष कर रहा है। जावद कृषि उपज मंडी में भावों में आई भारी गिरावट से किसानों में भारी रोष और निराशा है।

रिकॉर्ड ऊंचाई से धड़ाम हुए भाव

लहसुन के दाम जिस तेजी से गिरे हैं, उसने कृषि विशेषज्ञों को भी चौंका दिया है।

पिछले साल का रिकॉर्ड: पिछले सीजन में लहसुन ने 62,000 रुपये प्रति क्विंटल का ऐतिहासिक रिकॉर्ड छुआ था।

वर्तमान स्थिति: वर्तमान में भाव गिरकर 8,500 से 9,000 रुपये के बीच सिमट गए हैं।

मंडी का हाल: शनिवार को जावद मंडी में न्यूनतम भाव 1,500 और अधिकतम 10,500 रुपये प्रति क्विंटल रहा।

किसानों का दर्द: "लागत भी नहीं निकल रही"

मोरका के किसान कमल नागदा ने बताया कि 2 बीघा में लहसुन उगाने पर करीब 3 लाख रुपये का खर्च आया है, लेकिन मौजूदा कीमतों में मूल लागत भी वसूल नहीं हो रही है। पिछले साल इसी खेत ने उन्हें 9.30 लाख का मुनाफा दिया था।

व्यापारी सिंडिकेट पर आरोप और पलायन

किसानों ने व्यापारियों पर संगठित होकर दाम गिराने (सिंडिकेट बनाने) का गंभीर आरोप लगाया है।

तुलना: किसानों का कहना है कि जो लहसुन जावद में 6,500 रुपये में मांगा जा रहा है, वही राजस्थान के निम्बाहेड़ा में 7,500 रुपये और नीमच मंडी में 1,500 रुपये अधिक के भाव पर बिक रहा है।

मंडी से दूरी: जावद में सही दाम न मिलने के कारण अब किसान नीमच और निम्बाहेड़ा मंडियों की ओर रुख कर रहे हैं।

वहीं, व्यापारियों का तर्क है कि वे केवल मध्यस्थ हैं और आगे के बड़े बाजारों में मंदी होने के कारण ही वे ऊंचे दामों पर खरीद नहीं कर पा रहे हैं।

Similar News