आखिर होली पर क्यों बनाया जाता है गुजिया, जानिए इसका इतिहास

Update: 2025-02-25 18:40 GMT



फाल्गुन का महीना आते ही लोग होली का इंतजार करने लगते हैं. होली का जिक्र हो और गुजिया का नाम न आए? ऐसा तो हो ही नहीं सकता. होली पर लगभग हर घर में गुजिया को बनाया जाता है. वैसे भी मीठे के शौकीन तो पूरा साल गुजिया खाने के इंतजार में रहते हैं. खोए और मैदे से बनने वाली इस मिठाई का स्वाद लाजवाब लगता है.

गुजिया एक ऐसी डिश है, जिसके बिना होली अधूरी है. जब हम होली के बारे में सोचते हैं, तो सबसे पहले ख्याल गुजिया के मजेदार स्वाद का ही आता है. गुजिया उत्तर भारत की सबसे मशहूर और पारंपरिक मिठाई है, जिसमें खोया और ड्राईफ्रूट्स भरे जाते हैं. लेकिन क्या आप गुजिया के इतिहास के बारे में जानते हैं?

क्या है गुजिया है इतिहास

गुजिया के बनने की कहानी काफी पुरानी है. माना जाता है कि इसे 13वीं सदी में सबसे पहले बनाया गया था. उस वक्त गेंहू के आटे की छोटी रोटी बनाकर इसमें गुड़ और शहद का मिश्रण भरा जाता था. इसके बाद इसे धूप में अच्छे से सुखाया जाता है. वहीं, आधुनिक काल में 17वीं सदी के दौरान इसे बनाया गया था.

तुर्किए से कनेक्शन

गुजिया को किसने सबसे पहले बनाया, इसको लेकर कई सारी थ्योरी हैं. कुछ लोगों का यह भी कहना है कि यह डिश तुर्किए से आई है. तुर्किये में बनाया जाने वाला मशहूर बकलावा इसी तरह की ही मीठी डिश है. बकलावा भी आटे की परत मेंड्राई-फ्रूट्स को भरकर तैयार किया जाता है.

भारत में गुजिया का इतिहास

इतिहास की मानें तो भारत में गुजिया बुंदेलखंड की देन है. इसी इलाके में मैदे की परत में खोया भरकर गुजिया को बनाया गया. इसके बाद से ही, यह यूपी, मध्य प्रदेश औरराजस्थान तक जा पहुंचा.

होली पर क्यों बनाते हैं?

इसको लेकर कई सारी मान्यताएं जुड़ी हैं. माना जाता है कि फाल्गुन पूर्णिमा के दिन बुंदेलखंड के लोगों ने अपने प्रिय भगवान कृष्ण को आटे की लोई को चाशनी में डूबोकर खिलाया था. भगवान को यह प्रसाद काफी पसंद आया और तभी से ही होली पर गुजिया बननी शुरू हो गई.

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