आसावरा बैठक में शादी विवाह से जुड़े खर्चीले रिवाजों पर रोक, समाज सुधार के लिए कठोर नियम लागू
आसावरा राधे सुथार। समाज सुधार और उत्थान को लेकर जांगिड़ ब्राह्मण सुथार समाज की अहम बैठक आसावरा स्थित श्री विश्वकर्मा जांगिड़ ब्राह्मण धर्मशाला में आयोजित हुई। बैठक में चित्तौड़गढ़, उदयपुर, राजसमंद, भीलवाड़ा, प्रतापगढ़ और नीमच जिलों से आए प्रतिनिधियों, प्रबुद्धजनों और चौखला पंचों ने हिस्सा लिया। समाज में बढ़ती कुरीतियों और अनावश्यक खर्चों पर तीखी चर्चा के बाद सर्वसम्मति से सख्त निर्णय लिए गए, जिन्हें तुरंत लागू करने का ऐलान किया गया।
बैठक में तय किया गया कि शादी विवाह में चिरड़ी के नाम पर केवल दो तोला सोना और पांच सौ ग्राम चांदी ही दी या ली जाएगी। प्री वेडिंग कार्यक्रम, डीजे और बैण्ड पूरी तरह बंद रहेंगे। दूल्हा दाढ़ी बढ़ाकर विवाह में नहीं जाएगा और शादी से पहले यज्ञोपवीत संस्कार अनिवार्य रहेगा।
मायरा प्रथा में बहन से किसी भी प्रकार का रिटर्न गिफ्ट नहीं लिया जाएगा। धोवरा नानेरा, दादेरा और ससुराल पक्ष का ही मान्य होगा तथा लिफाफा प्रथा को स्वीकार किया गया है। गंगोज प्रसादी में केवल एक मिठाई बनेगी और जाजम पर किसी भी तरह की नशे की सामग्री का वितरण नहीं होगा। गंगोज में बर्तन या वस्त्र नहीं बांटे जाएंगे और किसी भी कार्यक्रम में वस्त्र व बर्तन का लेनदेन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
समाज ने यह भी तय किया कि सगाई या शादी टूटने की स्थिति में सीधे कानूनी कार्रवाई की बजाय पहले समाज के प्रबुद्धजनों के बीच बातचीत कर समाधान निकाला जाएगा। इसके साथ ही समाज के युवक युवतियों को गैर समाज में विवाह न करने का भी निर्णय लिया गया।
इन सभी नियमों को आसावरा चौखला में 27 जनवरी 2026 मंगलवार से लागू कर दिया गया है, जबकि अन्य चौखलों में अनुमोदन के बाद इन्हें लागू किया जाएगा।
