कोर्ट ने सरकार को दी चेतावनी: स्वास्थ्य और स्पा व्यवसाय में उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं

Update: 2025-09-20 03:49 GMT


 

 

 जयपुर।** राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ा संदेश दिया है कि स्वास्थ्य सेवा और स्पा-सेंटर संचालन में व्यापारियों के उत्पीड़न को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार अन्य राज्यों के उदाहरणों का अध्ययन कर नीति बनाए, जिससे व्यवसाय-अनुकूल माहौल सुनिश्चित हो। अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।

  सरकारी एजेंसियों की धमक और व्यापारियों की शिकायतें

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में स्वयं रोजगार करने वाले, वॉलिंटियर, ब्यूटी पार्लर, मसाज और स्पा केंद्र संचालक बार-बार सरकारी एजेंसियों के उत्पीड़न का शिकार हो रहे हैं। उनका कहना था कि कागज़ी कार्रवाई, अनावश्यक छानबीन और लाइसेंस संबंधी दिक्कतें उनके व्यवसाय में प्रत्यक्ष बाधा डालती हैं।

“छोटे और मध्यम व्यापारी अपनी मेहनत की कमाई गंवा रहे हैं। उत्पीड़न और असमंजस से कारोबार असुरक्षित हो गया है,” याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया।

 अन्य राज्यों के उदाहरणों को दिखाया गया

याचिकाकर्ता पक्ष ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के हालिया फैसले का हवाला देते हुए कहा कि वहां याचिकाओं को अभ्यावेदन के रूप में स्वीकार कर सरकार को नीति बनाने का निर्देश दिया गया। साथ ही हरियाणा विधि आयोग की सिफारिशें और दिल्ली-महाराष्ट्र की स्पा-सेंटर संचालन नीतियों का उल्लेख किया गया, ताकि राजस्थान में भी पारदर्शी और व्यवसाय-अनुकूल नियम लागू हों।

  सरकार की दलील और कोर्ट की सख्ती

राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को आश्वस्त किया कि किसी भी एजेंसी द्वारा अवैध उत्पीड़न नहीं किया जा रहा। हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं है। व्यवसायियों को उत्पीड़न से मुक्त माहौल और आसान लाइसेंसिंग प्रक्रिया सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

  15 अक्टूबर को अगली सुनवाई

कोर्ट ने अगली सुनवाई 15 अक्टूबर के लिए तय की है। इस दौरान यह स्पष्ट किया जाएगा कि राज्य सरकार व्यवसायियों की शिकायतों, अन्य राज्यों के उदाहरणों और न्यायालय के निर्देशों के आधार पर स्वास्थ्य और स्पा-सेंटर संचालन के लिए नई नीति बनाएगी या नहीं।

 

 

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