जन भागीदारी के माध्यम से ही कुपोषण को दूर करना संभव: उप निदेशक सीता शर्मा

Update: 2026-04-10 10:00 GMT

कोटा । भारत सरकार द्वारा 9 से 23 अप्रैल तक मनाए जा रहे '8वें पोषण पखवाड़ा' के अंतर्गत शुक्रवार को कोटा के लक्की बुर्ज सेंटर पर भव्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के केंद्रीय संचार ब्यूरो (क्षेत्रीय कार्यालय कोटा) द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में पौष्टिक व्यंजन प्रदर्शनी, रंगोली और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के जरिए पोषण का संदेश दिया गया।

आंगनबाड़ी केंद्र विकास की पहली पाठशाला

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि महिला एवं बाल विकास विभाग की उपनिदेशक सीता शर्मा ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास की नींव हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा, "कुपोषण के खिलाफ जंग केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जीती जा सकती है। स्वस्थ खान-पान के प्रति जागरूकता फैलाना समय की मांग है।" उन्होंने कार्यकर्ताओं से महिलाओं और बच्चों को कुपोषण मुक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

शिशु विकास के लिए शुरुआती 1000 दिन अहम

केंद्रीय संचार ब्यूरो के सहायक निदेशक रामेश्वर लाल मीणा ने पोषण के वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जीवन के पहले 1000 दिनों और 0 से 6 वर्ष की आयु के बीच मस्तिष्क का 85 प्रतिशत विकास हो जाता है। इसके लिए संतुलित पोषण और संवेदनशील देखभाल अनिवार्य है। बाल विकास परियोजना अधिकारी आलोक शर्मा ने 'राष्ट्रीय पोषण मिशन' के उद्देश्यों पर चर्चा करते हुए बताया कि तकनीक और जन भागीदारी के माध्यम से एनीमिय और कम वजन जैसी समस्याओं को जड़ से मिटाना ही इस अभियान का लक्ष्य है।

प्रतियोगिताओं में दिखा उत्साह

कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने रंगोली और पौष्टिक व्यंजनों की आकर्षक प्रदर्शनी लगाई। अंत में आयोजित मौखिक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में स्थानीय प्रतिभागियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिन्हें विभाग की ओर से पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम का संचालन प्रेम सिंह यादव ने किया। इस अवसर पर महिला पर्यवेक्षक सावित्री विजय, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संतोष, निशा सैनी, रचना सोनी सहित बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे उपस्थित रहे।

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