आरटीई में एडमिशन पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सरकार और निजी स्कूलों की अपील खारिज, फीस और सीटों को लेकर दिशा-निर्देश जारी
जयपुर। राजस्थान उच्च न्यायालय ने आरटीई (Right to Education Act) के तहत निजी स्कूलों में दाखिला देने संबंधी विवाद पर महत्वपूर्ण आदेश सुनाया है। कार्यवाहक सीजे एस पी शर्मा की खंडपीठ ने सरकार और निजी स्कूलों की अपीलें खारिज कर दीं और स्पष्ट किया कि प्री-प्राइमरी से लेकर पहली कक्षा तक, हर वह कक्षा जहां सामान्य (नॉन-RTE) छात्रों का प्रवेश होता है, 25% सीटें आरटीई के तहत गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रहेंगी। इसका मतलब है कि नर्सरी, केजी और पहली कक्षा में आरटीई के तहत प्रवेश अनिवार्य है।
हाईकोर्ट ने फीस प्रतिपूर्ति (reimbursement) को लेकर भी विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए। पहले 2020 के नोटिफिकेशन में केवल पहली कक्षा के आरटीई एडमिशन पर ही फीस प्रतिपूर्ति तय की गई थी, लेकिन कोर्ट ने इसे प्री-प्राइमरी स्तर तक विस्तारित किया। न्यायालय ने कहा कि आरटीई का उद्देश्य बच्चों को आरक्षित श्रेणियों से शिक्षा का समान अवसर देना है, इसलिए इसे कक्षाओं तक सीमित नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने सरकार और निजी स्कूलों की दलीलों को खारिज करते हुए यह सुनिश्चित किया कि सभी स्कूल आरटीई के तहत निर्धारित 25% सीटें भरें और फीस प्रतिपूर्ति के नियमों का सही तरीके से पालन करें।
इस फैसले का मकसद गरीब और कमजोर परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकार प्रदान करना और निजी स्कूलों को कानून के अनुरूप अपनी जिम्मेदारियों का पालन कराना है।