जीवन से अज्ञान ओर मिथ्यात्व को मिटाता है सम्यक दर्शन म.सा.

By :  vijay
Update: 2025-10-05 13:25 GMT

भीलवाड़ा, । नवपद का सातवां पड़ाव सम्यक दर्शन होता है। सम्यक दर्शन एक विश्वास, आस्था, भक्ति ओर उपासना है। ये अपनी आत्मा से साक्षात्कार करना है। जीवन की गाड़ी तभी सहज व सुचारू चल पाएगी जब उसमें सम्यक दर्शन रूपी वायपर लगा होगा। जब तक सम्यक दर्शन नहीं होगा तब तक सम्यक ज्ञान ओर सम्यक चारित्र की प्राप्ति नहीं हो सकती है। ये विचार श्रमण संघीय जैन दिवाकरीय मालव सिंहनी पूज्या कमलावतीजी म.सा. की सुशिष्या अनुष्ठान आराधिका ज्योतिष चन्द्रिका महासाध्वी डॉ. कुमुदलताजी म.सा. ने आध्यात्मिक चातुर्मास आयोजन समिति द्वारा सुभाषनगर  संघ के तत्वावधान में दिवाकर कमला दरबार में रविवार को चातुर्मासिक प्रवचन में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जीवन में अज्ञान, मिथ्यात्व ओर असम्यक को हटाने के लिए सम्यक दर्शन रूपी फिटकरी का उपयोग करना चाहिए। हमे चिंतन करना होगा कि हम जिसे सम्यक दर्शन मान रहे है कहीं वह मिथ्यात्व दर्शन तो नहीं है। ऐसा होगा तो वेदना सहनी पड़ेगी। सम्यक दर्शन रूपी लौ जलने पर ज्ञान के हजारों दीपक प्रज्वलित होते है ओर जीवन में मिथ्यात्व ओर अंधकार नहीं आते है। ये आत्मा को प्रकाशवान बनाता है। हमारा ध्यान अच्छाई की तरफ होने पर जीवन पवित्र बन जाएगा। वास्तुशिल्पी डॉ. पद्मकीर्तिजी म.सा. ने नवपद आराधना के तहत श्रीपाल चरित्र के विभिन्न प्रसंगों का वाचन करते हुए कहा कि जीवन में किसी से वादा करे तो उसे याद रखकर निभाना चाहिए। वादा वो ही करना चाहिए जो हम निभा सके।  पाल मैनासुंदरी से किया हुआ वह वादा कभी नहीं भूलता है कि 12 वर्ष पूर्ण होने पर घर लौट आउंगा। उन्होंने नवपद की महिमा बताते हुए कहा कि श्रद्धा व भक्ति भाव से नवपद का स्मरण करने से हर कार्य पूर्ण हो जाता ओर सर्व सुख की प्राप्ति होती है। धर्मसभा में स्वर साम्राज्ञी महाप्रज्ञाजी म.सा. ने प्रेरणादायी भजन की प्रस्तुति दी। धर्मसभा में साध्वी कुमुदलताजी म.सा. आदि ठाणा ने श्रमण संघीय युवाचार्य महेन्द्रऋषिजी म.सा. के जन्मदिवस पर उनके प्रति हार्दिक मंगलभावनाएं व्यक्त की। धर्मसभा में कोटा श्रीसंघ के अध्यक्ष प्रेमचंद पोरवाल, जावरा से आए जितेन्द्र जैन, मनीष जैन, मनीष पोखरणा, मधुबाला जैन, ब्यावर से कमल कोठारी,चित्तौड़गढ़ से मनुसखलाल पटवारी,महावीर कांठेड़ आदि अतिथियों का स्वागत आध्यात्मिक चातुर्मास आयोजन समिति एवं सुभाषनगर  संघ की ओर से मदनलाल सिपानी, बंशीलाल बोहरा, प्रवीण पोखरना, अनिल कोठारी, राजेन्द्र चण्डालिया, महावीर कोठारी,नितिन बापना, शकुन्तला खमेसरा आदि ने किया। संचालन चातुर्मास समिति के अनिलकुमार कोठारी ने किया। महासाध्वी मण्डल के सानिध्य में नवपद आयम्बिल ओली आराधना जारी है। नियमित प्रवचन के बाद वास्तुशिल्पी पद्मकीर्तिजी म.सा. ने आयम्बिल विधि सम्पन्न कराई। आयम्बिल की व्यवस्था चातुर्मास समिति द्वारा की गई थी। आयम्बिल व्यवस्था में टीना बापना, पिंकी चीपड़, नेहा छाजेड़ आदि कार्यकर्ता सक्रिय भूमिका निभा रहे है।

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