मांडल सरपंच और सचिव पर करोड़ों के भूमि गबन का आरोप: एसडीएम ने गठित की तीन सदस्यीय जांच कमेटी
भीलवाड़ा /मांडल/हलचल। मांडल ग्राम पंचायत में बेशकीमती आबादी भूमि को लेकर उपजा विवाद गहराता जा रहा है। पंचायत के वर्तमान सरपंच और ग्राम विकास अधिकारी (सचिव) पर अपने पद का दुरुपयोग कर करोड़ों रुपये की सरकारी भूमि को खुर्द-बुर्द करने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस मामले में प्रशासन ने अब कड़ा रुख अपनाया है।
तीन सदस्यीय कमेटी करेगी जांच
पूर्व में इस संबंध में जिला कलेक्टर को दिए गए ज्ञापन पर संज्ञान लेते हुए मांडल उपखण्ड अधिकारी (SDM) ने एक तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया है। प्रशासन का मानना है कि विस्तृत जांच के बाद ही वास्तविकता सामने आ पाएगी। सोमवार को भी समस्त ग्रामवासियों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर जल्द से जल्द कार्रवाई की मांग दोहराई है।
सरपंच ने आरोपों को नकारा
उधर, इन गंभीर आरोपों पर अपनी सफाई देते हुए सरपंच संजय भण्डिया का कहना है कि पंचायत में किसी भी तरह का कोई फर्जीवाड़ा नहीं हुआ है। उन्होंने दावा किया कि सभी भूखंडों का आवंटन पूरी तरह नियमों के तहत ही किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच संजय भण्डिया और ग्राम विकास अधिकारी कजोड़मल गुर्जर ने नेशनल हाईवे और मुख्य रास्ते के पास स्थित बेशकीमती आबादी भूमि (आराजी नंबर 10037/5785, 10128/5785 व 8008) पर बिना किसी नीलामी प्रक्रिया के करीब 250-300 फर्जी पट्टे जारी कर दिए हैं। यह भूमि भविष्य की विकास योजनाओं और सरकारी कार्यालयों के लिए आरक्षित थी। ग्रामीणों ने मांग की है कि जांच पूरी होने तक सरपंच व सचिव को पद से हटाया जाए और रिकॉर्ड जब्त किया जाए।
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