डिप्टी सीएम डॉ. प्रेमचंद बैरवा का 'एक्शन अवतार': बीच सफर रुकवाई रोडवेज बस, कंडक्टर की बोलती बंद, अफसरों को सरेआम लताड़ा
जयपुर । राजस्थान के उपमुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा शुक्रवार को एक अलग ही अंदाज में नजर आए। प्रदेश में रोडवेज बसों की खस्ताहाली और सुविधाओं के अभाव की शिकायतों के बीच, मंत्री जी ने अचानक अपना काफिला रुकवाया और एक चलती रोडवेज बस का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान बस में मिली भारी खामियों और स्टाफ की लापरवाही देख मंत्री का पारा चढ़ गया और उन्होंने मौके पर ही अधिकारियों की क्लास लगा दी।
कंडक्टर की गणित फेल: 45 या 47? मंत्री के सवाल पर सन्नाटा
निरीक्षण के दौरान सबसे चौंकाने वाला वाकया तब हुआ जब मंत्री ने कंडक्टर से यात्रियों की संख्या पूछी। पहले कंडक्टर ने संख्या 45 बताई, लेकिन अगले ही पल बदलकर 47 कह दी। डॉ. बैरवा ने तुरंत टोका— "45 हैं या 47? सही आंकड़ा क्या है?" कंडक्टर के पास कोई जवाब नहीं था। मंत्री के आदेश पर जब मौके पर गिनती हुई, तो हकीकत और कागजों का अंतर साफ उजागर हो गया।
राम भरोसे सुरक्षा: न मेडिकल किट, न ठीक इंडिकेटर
सवारियों की सुरक्षा को लेकर जब मंत्री ने बस की बारीकी से जांच की, तो हालात डराने वाले मिले:
गायब मेडिकल किट: जब ड्राइवर से 'फर्स्ट एड' किट के बारे में पूछा गया, तो उसने साफ मना कर दिया कि बस में कोई किट नहीं है।
टूटा इंडिकेटर: मंत्री की नजर बस के फूटे हुए इंडिकेटर पर पड़ी। बस की जर्जर बॉडी और मेंटेनेंस की कमी देख उन्होंने गहरी नाराजगी जताई।
"काम क्यों नहीं हो रहा?" – अधिकारियों पर बरसे मंत्री
निरीक्षण के दौरान बस ड्राइवर ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि वह बार-बार डिपो में कमियों की शिकायत करता है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती। इस पर मंत्री ने साथ चल रहे अधिकारियों को फटकार लगाते हुए पूछा— "ड्राइवर बोल रहा है कि वह गाड़ी बार-बार दिखाता है, फिर भी काम क्यों नहीं हो रहा?" उन्होंने तुरंत खामियों को नोट करने और संबंधित डिपो मैनेजर के खिलाफ रिपोर्ट तैयार करने के कड़े निर्देश दिए।
रोडवेज में बड़े प्रशासनिक बदलाव के संकेत
उपमुख्यमंत्री के इस कड़े रुख ने राजस्थान रोडवेज (RSRTC) के अधिकारियों में हड़कंप मचा दिया है। डॉ. बैरवा ने स्पष्ट संदेश दिया है कि यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले वर्कशॉप अधिकारियों और लापरवाह स्टाफ पर गाज गिरना तय है। आने वाले दिनों में रोडवेज की कार्यप्रणाली में बड़े बदलाव और ऐसे और भी औचक निरीक्षण देखने को मिल सकते हैं।
