पोटलां में राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ पर पांच दिवसीय उत्सव आयोजित
पोटलां। उपतहसील मुख्यालय पर राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ के मौके पर पांच दिवसीय कार्यक्रमों का भव्य आयोजन हुआ। आयोजन से जुड़े कार्यकर्ताओं ने बताया कि नगर में राम मंदिर पर हुई राम जी की प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ पर अनेक आयोजन आयोजित हुए। पंचांग के अनुसार 31 दिसंबर को तिथि पर आयोजन आयोजित हुए जिसमें 31 दिसंबर से 3 जनवरी तक 75 घंटे की अखंड राम धुन का आयोजन हुआ उससे एक दिन पूर्व आयोजनों का आगाज हुआ जिसमें गढवाले बालाजी मंदिर, चामुंडा माता मंदिर, गणेश जी मंदिर रावला चौक, चारभुजा नाथ मंदिर शिव परिवार मंदिर, सहित अनेक मंदिरों में विशेष श्रृंगार चोला बागा, पूजा, हवन, भजन, रामचरितमानस पाठ, सुंदरकांड पाठ, हनुमान चालीसा पाठ और ध्वजारोहण जैसे कार्यक्रम हुए, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया उसके बाद पंचवटी धाम पर मंशापूर्ण बालाजी मंदिर पर पर अखंड राम धुन का 31 दिसंबर से आगाज हुआ जिसमें रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीताराम... कौशल्या के प्यारे, राम दशरथ नंदन प्यारे राम... जैसे अनेक रामजी के स्नेहिल स्पर्शी शब्दों से राम धुन का आयोजन हुआ जिससे आस्था, संस्कृति और उत्सव का माहौल बना रहा एवं वातावरण राममय हो गया. राम धुन की पूर्णाहुति शनिवार को संध्या आरती पर हुई संध्या आरती के दौरान मंशापूर्ण बालाजी मंदिर पर को विशेष डेकोरेशन कर रोशनी से सजाया गया एवं दीप जलाकर आकर्षक सजावट की गई, मंशापूर्ण बालाजी को संध्या आरती पश्चात 201 किलो गाजर के हलुआ एवं बुंदी, रोट गुड़, मावा, गुड़ चना, संतरा, केला सहित अनेक वस्तुओं का भोग लगाया गया भोग लगाकर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया इस दौरान दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, और श्रद्धालुओं ने बड़े उत्साह से भाग लिया. उसके बाद भजन संध्या का आयोजन हुआ जो भोर तक चला जिसमें भजन गायकों कलाकारों द्वारा अनेक रंगारंग प्रस्तुतियां दी जिसमें छम छम नाचे मेरे वीर हनुमाना... दुनिया में देव हजारों है मेरे बजरंगबली का क्या कहना... लाल लंगोटा हाथ में गोटा तरी जय हो पवन कुमार... सहित अनेक भजनों से भगवान को रिझाया जो भक्तों को नाचने पर विवश कर दिया भजन संध्या भोर का दौर तक चला अल सुबह 5 दिवसीय कार्यक्रमों की पूर्णाहुति हुई इस दौरान भक्तों ने बताया कि यह सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और भारतीय परंपराओं का एक भव्य उत्सव बन गया.