मनरेगा पर हमला बर्दाश्त नहीं — 45 दिवसीय “मनरेगा बचाओ महासंग्राम” का शंखनाद

Update: 2026-01-09 12:17 GMT


भीलवाड़ा | केंद्र की मोदी सरकार द्वारा मनरेगा जैसे गरीब-मजदूर हितैषी कानून को खत्म करने की साज़िश के खिलाफ अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के आह्वान एवं गोविन्द सिंह डोटासरा अध्यक्ष राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार पर 10 जनवरी से 25 फ़रवरी तक चलने वाले 45 दिवसीय “मनरेगा बचाओ अभियान” को लेकर आज दिनांक 9 जनवरी 2026 को भीलवाड़ा शहर जिला कांग्रेस कमेटी की एक निर्णायक और संघर्षशील बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष शिवराम खटीक ने की।

बैठक में साफ शब्दों में कहा गया कि मोदी सरकार मनरेगा के रोजगार के कानूनी अधिकार को छीनकर उसे भीख में बदलना चाहती है। तथाकथित ‘वी-बी-जी राम जी कानून’ के माध्यम से केंद्र सरकार गरीब, मजदूर, किसान और ग्रामीण भारत की रीढ़ पर सीधा हमला कर रही है, जिसे कांग्रेस किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देगी।

बैठक को संबोधित करते हुए एडवोकेट कुणाल ओझा ने बताया की

“मनरेगा कोई सरकार की दया नहीं, बल्कि संविधान से मिला अधिकार है। इस अधिकार को खत्म करने की हर साज़िश का सड़क से संसद तक जवाब दिया जाएगा।”

जिला अध्यक्ष शिवराम खटीक (जीपी) ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि

“मोदी सरकार जनविरोधी नीतियों की फैक्ट्री बन चुकी है। पहले रोजगार छीना, अब रोजगार का अधिकार भी खत्म करने पर तुली है। कांग्रेस हर गांव, हर वार्ड और हर गली में उतरकर मनरेगा बचाने की लड़ाई लड़ेगी।”

उन्होंने कहा कि मनरेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है और इसे कमजोर करने का मतलब करोड़ों गरीब परिवारों को भूख, बेरोजगारी और पलायन की आग में झोंकना है। कांग्रेस इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करेगी।

बैठक में वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं अक्षय त्रिपाठी, अनिल डांगी, संजय पेड़ीवाल, मोहम्मद याकूब, धर्मेंद्र पारीक, मनोज पालीवाल, राजेंद्र जैन, प्रकाश ओझा, राजकुमार माली, शिवप्रकाश घावरी, अनिता पहाड़िया, सीपी अमारवाल ने एक स्वर में कहा कि अब केवल बयान नहीं, मैदान में उतरकर निर्णायक संघर्ष होगा।

बैठक में आगामी 45 दिनों के आंदोलनात्मक कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की गई — धरना, प्रदर्शन, जनसंवाद, पदयात्रा और केंद्र सरकार के खिलाफ निर्णायक आंदोलन किए जाएंगे।

इस महासंग्राम में कांग्रेस पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसजन मौजूद रहे। बैठक के अंत में ऐलान किया गया कि “मनरेगा बचेगा — तभी गरीब बचेगा, और कांग्रेस इस लड़ाई में आख़िरी दम तक डटी रहेगी।”

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