भीलवाड़ा सुर संगम: शास्त्रीय संगीत की सुमधुर लहरों के साथ 13वें संस्करण का भव्य समापन

Update: 2026-04-06 08:02 GMT

नई दिल्ली । एलएनजे भीलवाड़ा ग्रुप द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित भारतीय शास्त्रीय संगीत उत्सव ‘भीलवाड़ा सुर संगम’ का 13वां संस्करण रविवार को कमानी ऑडिटोरियम में संपन्न हुआ। दो दिवसीय इस आयोजन के अंतिम दिन दिग्गज कलाकारों की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

सितार और खयाल गायकी का अनूठा संगम

शाम का आगाज श्री समन्वय सरकार के सितार वादन से हुआ। उन्होंने अपनी तकनीकी कुशलता और रागों पर मजबूत पकड़ से ऑडिटोरियम में समां बांध दिया। अपनी प्रस्तुति के बाद उन्होंने कहा कि यहाँ के श्रोताओं की ऊर्जा और समझ कलाकार को राग की आत्मा व्यक्त करने का पूरा अवसर देती है।

वहीं, उत्सव का मुख्य आकर्षण प्रख्यात हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक पं. मुकुल शिवपुत्र की प्रस्तुति रही। अपनी विशिष्ट आध्यात्मिक शैली के लिए पहचाने जाने वाले पंडित जी ने जटिल आलाप और गहरी भावनात्मक अभिव्यक्ति से श्रोताओं को एक ध्यानपूर्ण अनुभव कराया। उन्होंने संगीत को अपनी साधना बताते हुए भीलवाड़ा सुर संगम के मंच की सराहना की।

विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प

एलएनजे भीलवाड़ा ग्रुप के चेयरमैन रवि झुनझुनवाला ने उत्सव की सफलता पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा, "भीलवाड़ा सुर संगम केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक परंपरा है। यह देखकर खुशी होती है कि नई पीढ़ी भी हमारी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभा रही है।" उन्होंने शास्त्रीय संगीत को भावी पीढ़ियों तक पहुँचाने के अपने संकल्प को दोहराया।

दोनों दिनों में उमड़ी भारी भीड़ ने यह सिद्ध कर दिया कि शास्त्रीय संगीत की जड़ें आज भी गहरी हैं। यह उत्सव कलाकारों और रसिकों के बीच एक सार्थक सेतु के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए है।

Tags:    

Similar News