महात्मा गांधी अस्पताल व एमसीएच इकाई में अव्यवस्थाएँ चरम पर, मरीजों को भारी परेशानी

Update: 2025-12-03 06:36 GMT

भीलवाड़ा। आज दिनांक 3 दिसम्बर 2025 को शहर के महात्मा गांधी अस्पताल में उपचार के लिए पहुँच रहे मरीजों को गंभीर अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ रहा है। पर्ची कटवाने से लेकर डॉक्टर को दिखाने और दवा वितरण तक हर चरण में मरीजों को लंबी और थका देने वाली लाइनों से गुजरना पड़ रहा है। भीड़ बढ़ने के बावजूद पंजीयन काउंटरों की संख्या कम होने के कारण लोग घंटों तक लाइन में खड़े रहकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। स्थिति यह है कि कई बार दोपहर तीन बजे आउटडोर बंद होने तक भी कई मरीज डॉक्टर तक पहुँचना तो दूर, पर्ची कटवाने तक में असफल रह जाते हैं और मायूस होकर वापस लौटने को मजबूर हो जाते हैं।

साधारण जांचों में भी देरी मरीजों की परेशानी और बढ़ा रही है। खून व मूत्र जैसी रिपोर्टें अगले दिन उपलब्ध होती हैं, जिससे दो-दो दिन अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ते हैं। वहीं सोनोग्राफी, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी जांचों के लिए एक-एक महीने बाद की तिथियाँ दी जा रही हैं, जिससे गंभीर मरीजों को भी समय पर राहत नहीं मिल पा रही।

उधर, एमसीएच अस्पताल की स्थिति भी अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है। डिलीवरी के लिए आने वाली प्रसूता महिलाओं के परिजनों के बैठने या साथ रहने की कोई व्यवस्था नहीं है। इसके चलते प्रसव पीड़ा में कराहती महिलाएँ वार्ड में चीखती–चिल्लाती दिखाई देती हैं। न तो पर्याप्त महिला स्टाफ है और न ही साथ आई महिलाओं को उनके पास बैठने दिया जाता है। प्रसूता वार्ड में साफ-सफाई की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है।

राजस्थान मेडिकल रिलीफ सोसायटी के पूर्व सदस्य मोहम्मद हारून रंगरेज (MHR) ने इन समस्याओं पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भीलवाड़ा जैसे महत्वपूर्ण जिले में सरकारी अस्पताल की ऐसी अव्यवस्थित स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण है। MHR ने पंजीयन काउंटर बढ़ाने, जांच समय कम करने, गंभीर मरीजों को प्राथमिकता देने तथा एमसीएच अस्पताल में प्रसूता महिलाओं की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने की तत्काल आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि मरीजों की पीड़ा को समझते हुए अस्पताल प्रशासन को शीघ्र सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए।

MHR ने सरकार और चिकित्सा विभाग से मांग की कि महात्मा गांधी अस्पताल और एमसीएच इकाई में व्यवस्थाओं को तुरंत दुरुस्त किया जाए, ताकि आमजन को समय पर इलाज मिल सके और प्रसूता महिलाओं को सुरक्षित व मानवीय वातावरण उपलब्ध हो सके।

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