गर्भवती महिलाओं को मिली निःशुल्क जांच, उपचार व परामर्श की सौगात

Update: 2026-01-09 11:59 GMT

भीलवाडा,। मातृत्व स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने और गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित, स्वस्थ एवं जटिलता रहित प्रसव सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुक्रवार को जिलेभर के समस्त राजकीय जिला चिकित्सालयों, उप जिला चिकित्सालयों, सीएचसी व पीएचसी पर प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस (पीएमएसएमए) का आयोजन किया गया। इस अवसर पर गर्भवती महिलाओं को एक ही छत के नीचे विभिन्न प्रकार की निःशुल्क जांच एवं उपचार सेवाएं उपलब्ध कराई गईं।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामकेश गुर्जर ने बताया कि सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से स्त्री रोग विशेषज्ञों एवं प्रशिक्षित चिकित्सकों द्वारा गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच की गई। इसमें रक्तचाप, वजन, शुगर, यूरिन जांच, अल्ट्रासाउंड, हीमोग्लोबिन जांच सहित आवश्यक परीक्षण शामिल रहे। जांच के दौरान सामान्य से कम हिमोग्लोबिन पाई गई एनीमिक महिलाओं को चिन्हित कर उन्हें तत्काल उपचार उपलब्ध कराया गया।

सामान्य से कम हीमोग्लोबिन वाली महिलाओं को लगाए एफसीएम इंजेक्शन-

डिप्टी सीएमएचओ डॉ. प्रवीण झरवाल ने बताया कि अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिन गर्भवती महिलाओं में हीमोग्लोबिन का स्तर बहुत कम है तथा उन्हें आयरन की गोलियों पर्याप्त मात्रा में लेने के बावजूद हीमोग्लोबिन स्तर में वृद्धि नहीं हो रही, उन्हें चिकित्सकीय परामर्श के बाद एफसीएम इंजेक्शन लगाए गए, जिससे उनके शरीर में आयरन की कमी को शीघ्रता से पूरा किया जा सके और गर्भावस्था के दौरान संभावित जटिलताओं से बचाव हो सके। डॉ. झरवाल ने बताया कि एफसीएम इंजेक्शन सुरक्षित है और इससे शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर तेजी से बढ़ता है। एनीमिया से घबराएं नही, जागरूक बनें और समय पर चिकित्सा केन्द्रों पर जाकर निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ प्राप्त करें। अभियान के दौरान महिलाओं को आयरन युक्त आहार, संतुलित भोजन, नियमित जांच एवं दवाओं के सेवन के बारे में भी परामर्श दिया गया।

इस अवसर पर चिकित्सकों ने गर्भवती महिलाओं को उच्च जोखिम गर्भावस्था (हाई रिस्क प्रेग्नेंसी) के लक्षणों की जानकारी दी तथा समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराने के लिए प्रेरित किया। जिन महिलाओं में जटिलताओं की आशंका पाई गई, उन्हें उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर कर आगे के उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को दूसरी व तीसरी तिमाही में विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध कराना है, ताकि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सके। इस अभियान के माध्यम से समय रहते बीमारी की पहचान कर उपचार संभव हो पाता है। अभियान के दौरान संस्थानों में कार्यरत नर्सिंग स्टाफ, एएनएम, आशा सहयोगिनियों एवं स्वास्थ्य कर्मियों की सक्रिय सहभागिता रही। उन्होंने महिलाओं का पंजीकरण, जांच में सहयोग तथा फॉलोअप की जिम्मेदारी निभाई।

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