भीलवाड़ा । आरजिया महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशालय के अंतर्गत फसल विविधीकरण परियोजना के तहत कृषि विविधीकरण एवं संसाधन प्रबंधन में उन्नत रणनीतियों पर दो दिवसीय कृषि विस्तार अधिकारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन बारानी कृषि अनुसंधान केन्द्र, आरजिया (भीलवाड़ा) में किया गया, जिसमें 30 से अधिक कृषि अधिकारियों एवं कृषि पर्यवेक्षकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य अधिकारियों एवं तकनीकी कार्मिकों को कृषि विविधीकरण, प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग, लागत प्रभावी खेती प्रणालियों तथा जल, मृदा एवं फसल प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों से अवगत कराना रहा। प्रशिक्षण के दौरान क्षेत्र विशेष की कृषि समस्याओं एवं उनके व्यवहारिक समाधानों पर विस्तृत चर्चा की गई।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में डॉ. हरि सिंह, परियोजना प्रभारी द्वारा कृषि विविधीकरण की आवश्यकता, फसल आधारित एवं समन्वित कृषि प्रणालियों के माध्यम से किसानों की आय वृद्धि पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार किसान कृषि विविधीकरण में वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं नवीन अनुसंधान परिणामों को अपनाकर नई फसलों की उत्पादकता एवं मृदा स्वास्थ्य में सुधार कर सकते हैं।
मुख्य वैज्ञानिक, डॉ. एल. के. छात्ता ने अपने व्याख्यान में कहा कि विविधीकृत कृषि प्रणाली में एक से अधिक फसलों का समयानुसार एवं स्थानानुसार समावेश कर फसलों में रोगों के प्रभाव को कम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि सांस्कृतिक, जैविक एवं रासायनिक तकनीकों का समुचित समन्वय ही विविधीकृत फसलों में रोग प्रबंधन का सर्वोत्तम उपाय है। विविधीकृत कृषि प्रणाली में रोग प्रबंधन के लिए समन्वित दृष्टिकोण अपनाकर उत्पादन लागत कम की जा सकती है तथा किसानों की आय को स्थायी रूप से बढ़ाया जा सकता है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान डॉ. रामावतार ने फसल विविधीकरण के अंतर्गत खरपतवार प्रबंधन विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने विभिन्न फसल प्रणालियों में उभरने वाले प्रमुख खरपतवारों की पहचान, उनके नियंत्रण हेतु यांत्रिक एवं रासायनिक उपायों तथा समन्वित खरपतवार प्रबंधन की व्यवहारिक उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने फसल चक्र अपनाने एवं समय पर खरपतवार नियंत्रण को उत्पादन वृद्धि के लिए अत्यंत आवश्यक बताया।
वहीं डॉ. के.सी. नागर, वैज्ञानिक (फसल प्रबंधन) ने उन्नत फसल प्रबंधन तकनीकों, संसाधन संरक्षण, जल उपयोग दक्षता, जलवायु अनुकूल कृषि रणनीतियों एवं आधुनिक कृषि पद्धतियों पर व्याख्यान प्रस्तुत किया।
इसी क्रम में मयंक गोयल द्वारा प्रमुख फसलों में पोषक तत्व प्रबंधन विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया गया। उन्होंने मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक उपयोग, संतुलित पोषण, सूक्ष्म पोषक तत्वों की भूमिका तथा उर्वरकों के दक्ष उपयोग से लागत में कमी एवं उत्पादकता बढ़ाने की रणनीतियों की जानकारी दी। उनके व्याख्यान से प्रतिभागियों को टिकाऊ एवं लाभकारी खेती अपनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम के दौरान समूह चर्चा, अनुभव साझा सत्र एवं प्रश्नोत्तर के माध्यम से प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता रही। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी एवं व्यवहारिक बताते हुए भविष्य में भी इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर डाॅ- हरि सिंह ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी विशेषज्ञों, अधिकारियों व ंसंकाय सदस्यों का आभार व्यक्त किया। प्रशिक्षण के सफल संचालन में तकनीकी दल के मदन लाल मरमट व बृजेश यादव की सक्रिय भूमिका रही।
प्रशिक्षण के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और विशेषज्ञों से समाधान प्राप्त किए। अधिकारियों ने इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बताया
