पितृपक्ष 8 सितंबर से शुरू, 14 दिन तक श्रद्धालु करेंगे पिंडदान और तर्पण

Update: 2025-09-03 06:40 GMT


भीलवाड़ा  : आश्विन कृष्ण प्रतिपदा, 8 सितंबर (सोमवार) से पितृपक्ष शुरू हो रहा है, जो 21 सितंबर (रविवार) आश्विन कृष्ण अमावस्या तक चलेगा। इस बार नवमी तिथि के क्षय के कारण पितृपक्ष 14 दिनों का होगा। इस दौरान श्रद्धालु अपने पितरों की आत्मा की शांति और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध करेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जल और तिल से तर्पण करने से पितरों की आत्मा तृप्त होती है और वे अपने वंशजों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

पितृपक्ष में श्राद्ध की महत्ता



 



ज्योतिष आचार्य विक्रम सोनी के अनुसार, पितृपक्ष में पिता, पितामह, प्रपितामह, माता, पितामही, प्रपितामही, नाना, नानी और अन्य स्वर्गवासी परिजनों का गोत्र व नाम लेकर तर्पण किया जाता है। शास्त्रों में इसे पितरों का यज्ञ माना गया है। श्राद्ध से तृप्त होकर पितृगण वंशजों की समस्त कामनाएं पूरी करते हैं। पितृपक्ष में किए गए दान और भावपूर्ण तर्पण से पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है, जो शास्त्रों में देव ऋण और गुरु ऋण के साथ तीन प्रमुख ऋणों में से एक है।

तिथि के अनुसार करें श्राद्ध

अमावस्या (21 सितंबर): जिनकी मृत्यु तिथि अज्ञात हो या अकाल मृत्यु हुई हो, उनका श्राद्ध इस दिन करें।

चतुर्थी (11 सितंबर): आत्महत्या या हत्या से मृत व्यक्तियों का श्राद्ध।

नवमी (15 सितंबर): जीवित पति के साथ मृत पत्नी का श्राद्ध।

एकादशी (17 सितंबर): साधु और सन्यासियों का श्राद्ध।

चतुर्दशी (20 सितंबर): शस्त्रादि से मृत्यु प्राप्त पितरों का श्राद्ध।

सर्वपितृ अमावस्या (21 सितंबर): स्नान-दान, ब्राह्मण भोजन और महालया पर्व के साथ पितृ विसर्जन। अमावस्या तिथि सूर्योदय से रात 12:28 बजे तक रहेगी।

पितृपक्ष का महत्व और परंपरा

पितृपक्ष में श्राद्ध और तर्पण की परंपरा भारतीय संस्कृति की अनमोल विरासत है। यह न केवल पितरों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का अवसर है, बल्कि उनके प्रति कृतज्ञता और सम्मान का प्रतीक भी है। जल और तिल से तर्पण करने से पितरों को तृप्ति मिलती है, और वे अपने वंशजों को सुखी और समृद्ध जीवन का आशीर्वाद देते हैं। यह समय पितृ ऋण से मुक्ति और पारिवारिक एकता को मजबूत करने का भी है।

पितृपक्ष 2025: एक नजर में

7 सितंबर (शनिवार): अगस्त्य ऋषि तर्पण

8 सितंबर (सोमवार): पितृपक्ष आरंभ (प्रतिपदा)

11 सितंबर (गुरुवार): चतुर्थी श्राद्ध

15 सितंबर (सोमवार): मातृ नवमी

17 सितंबर (बुधवार): इंदिरा एकादशी

20 सितंबर (शनिवार): चतुर्दशी श्राद्ध

21 सितंबर (रविवार): सर्वपितृ अमावस्या, महालया और पितृ विसर्जन

श्रद्धालुओं से अपील है कि वे इस पवित्र अवधि में अपने पितरों को श्रद्धांजलि अर्पित करें और उनकी आत्मा की शांति के लिए तर्पण व दान करें।

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