एक ही परिवार के तीन सदस्यों का अंतिम संस्कार, एक साथ उठी तीन अर्थियां देख हर आंख हुई नम
पाली। शहर में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत ने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है। शुक्रवार दोपहर जब पोस्टमार्टम के बाद मां और दोनों बेटों के शव परिजनों को सौंपे गए, तो माहौल बेहद गमगीन हो गया। शवों की स्थिति खराब होने के कारण बांगड़ अस्पताल से उन्हें सीधे श्मशान घाट ले जाया गया, जहां एक साथ तीन अर्थियां देखकर हर मौजूद व्यक्ति की आंखें छलक आईं।
श्मशान में पसरा सन्नाटा, जल्दबाजी में हुआ अंतिम संस्कार
शवों से बदबू आने के कारण अंतिम संस्कार की प्रक्रिया जल्दबाजी में पूरी करनी पड़ी। परिवार की इच्छा तीनों का इलेक्ट्रिक दाह संस्कार करने की थी, लेकिन तकनीकी कारणों से केवल शांतिदेवी (65) और उनके छोटे बेटे रघुवीर (26) का ही इलेक्ट्रिक दाह संस्कार हो सका। बड़े बेटे नरपत का अंतिम संस्कार पारंपरिक अग्नि संस्कार के माध्यम से किया गया। इस दौरान समाज के लोगों और रिश्तेदारों की भारी भीड़ रही, लेकिन हर तरफ केवल सन्नाटा और दर्द ही महसूस हो रहा था।
गहने देख बिलख पड़ी बेटी, पूछा- 'भगवान ऐसा क्यों हुआ?'
सबसे मार्मिक दृश्य तब उत्पन्न हुआ जब पुलिस ने मृतका शांतिदेवी के गहने उनकी बेटी चेतना को सौंपे। मां की निशानियां देख चेतना खुद को संभाल नहीं पाई और फूट-फूटकर रो पड़ी। वह बार-बार भगवान से एक ही सवाल कर रही थी कि उसके परिवार के साथ ऐसा क्यों हुआ। परिजनों के लिए भी उसे संभालना मुश्किल हो रहा था।
बीमारी और मानसिक तनाव ने उजाड़ा परिवार
उल्लेखनीय है कि 9 अप्रैल की शाम औद्योगिक नगर थाना क्षेत्र स्थित एक मकान से इन तीनों के शव बरामद हुए थे। पुलिस को मौके से जहर की बोतल और एक सुसाइड नोट मिला था। जांच में सामने आया कि पिता की दो साल पहले हार्ट अटैक से मौत के बाद परिवार आर्थिक और मानसिक तनाव में था। बड़ा बेटा नरपत बीमारी के कारण आठ महीने से घर पर ही था, जबकि रघुवीर मोबाइल शॉप पर काम करता था। लगातार बढ़ती परेशानियों और बीमारी के बोझ ने इस हंसते-खेलते परिवार को खत्म कर दिया।