मात्र 5 रुपए में जानें अपने खेत की 'मिट्टी की सेहत', फसल की लागत घटेगी और बढ़ेगा उत्पादन

Update: 2026-04-02 04:10 GMT


 खेती को अधिक लाभप्रद और वैज्ञानिक बनाने की दिशा में सरकार की 'मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना' (Soil Health Card Scheme) मील का पत्थर साबित हो रही है। अब किसान मात्र 5 रुपए का मामूली शुल्क चुकाकर अपने खेत की मिट्टी की जांच करवा सकते हैं। कृषि विभाग द्वारा   चलाए जा रहे विशेष जागरूकता अभियान के तहत किसानों को अपनी मिट्टी की गुणवत्ता और उसमें मौजूद पोषक तत्वों की सटीक जानकारी दी जा रही है।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड: जमीन का 'हेल्थ रिपोर्ट कार्ड'

जांच के पश्चात किसानों को एक 'मृदा स्वास्थ्य कार्ड' प्रदान किया जाता है। इस कार्ड में मिट्टी में मौजूद नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश जैसे मुख्य तत्वों के साथ-साथ सूक्ष्म पोषक तत्वों की वर्तमान स्थिति का पूरा विवरण होता है। इससे किसान यह जान पाते हैं कि उनकी जमीन में किस तत्व की कमी है और किसकी अधिकता।

जांच के लिए मिट्टी का नमूना लेने की सही विधि

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, मिट्टी का नमूना सही तरीके से लेना अत्यंत आवश्यक है:

गड्ढा खोदना: खेत के चारों कोनों की मेड़ से एक मीटर जगह छोड़कर 9 इंच गहरा गड्ढा खोदें। साथ ही एक गड्ढा खेत के बीचों-बीच 'V' आकार का खोदें।

प्रक्रिया: 'V' आकार के गड्ढे से निकाली गई मिट्टी को बारीक कूटकर पीस लें और उसे बराबर चार भागों में बांटें।

चयन: आमने-सामने के दो हिस्सों को छोड़ दें और शेष दो हिस्सों को मिलाकर पुनः चार भागों में बांटें। अंत में लगभग 500 ग्राम मिट्टी लेकर बायोडिग्रेडेबल थैली में भरें।

लेबलिंग: थैली पर और थैली के अंदर एक लेबल लगाएं, जिसमें किसान का नाम, पिता का नाम, खसरा नंबर, खेत का नाप (सिंचित/असिंचित), पिछली फसल और आगामी ली जाने वाली फसल का स्पष्ट उल्लेख हो।

जांच से होने वाले प्रत्यक्ष लाभ

बिना जांच के अंधाधुंध खाद और उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति क्षीण हो रही है। इस योजना के लाभ इस प्रकार हैं:

लागत में कमी: जरूरत के अनुसार खाद डालने से अनावश्यक खर्च बचता है।

उत्पादन में वृद्धि: संतुलित पोषक तत्व मिलने से फसल की पैदावार बढ़ती है।

भूमि सुधार: यदि जमीन में कोई रसायनिक या जैविक समस्या है, तो उसकी पहचान कर सुधार करना आसान हो जाता है।

टिकाऊ खेती: रसायनिक, भौतिक और जैविक गुणों के संतुलन से जमीन लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहती है।

कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से अपील की है कि वे हर दो से तीन साल में अपने खेत की मिट्टी की जांच अवश्य करवाएं ताकि खेती लंबे समय तक टिकाऊ और लाभदायक बनी रहे।

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