शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के अपमान पर चित्तौड़गढ़ में आक्रोश: कांग्रेस ने घेरा कलेक्ट्रेट, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
चित्तौड़गढ़ (बीएचएन)। ज्योतिष पीठ प्रयागराज के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की छवि धूमिल करने और उनके खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर को लेकर राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। पूर्व राज्यमंत्री सुरेंद्र सिंह जाड़ावत के नेतृत्व में शहर एवं ग्रामीण कांग्रेस के पदाधिकारियों ने मंगलवार को जिला कलेक्टर को महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा और केंद्र व उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
षड्यंत्र का आरोप: 'गौ सेवा की बात उठाने पर बनाया जा रहा निशाना'
प्रवक्ता नवरतन जीनगर ने बताया कि कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन के दौरान पूर्व राज्यमंत्री जाड़ावत ने इसे एक गहरा राजनैतिक षड्यंत्र करार दिया। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य जी लंबे समय से गौ रक्षा और भारत से गौ-मांस निर्यात में हो रही वृद्धि का प्रखर विरोध कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश का नाम गौ-मांस निर्यात में अग्रणी राज्यों में आने पर उन्होंने योगी सरकार को घेरा था, जिसके बाद से ही उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। हाल ही में मौनी अमावस्या पर उन्हें संगम स्नान से रोकना और बटुकों के साथ मारपीट करना इसी कड़ी का हिस्सा है।
हिस्ट्रीशीटर द्वारा केस दर्ज कराना संदेह के घेरे में
कांग्रेस पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि एक हिस्ट्रीशीटर आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा शंकराचार्य पर यौन उत्पीड़न का केस दर्ज करवाना पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है। उन्होंने सवाल उठाया कि शिकायतकर्ता एक अन्य प्रमुख संत का शिष्य है, जो मामले को और संदिग्ध बनाता है। प्रयागराज के झूसी थाने में बीएनएस और पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज होना करोड़ों हिंदुओं की आस्था पर चोट है।
केंद्रीय एजेंसियों से जांच और एफआईआर निरस्त करने की मांग
सुरेंद्र सिंह जाड़ावत ने अंदेशा जताया कि उत्तर प्रदेश सरकार राजनैतिक द्वेष के चलते शंकराचार्य जी को बंदी बना सकती है या उन्हें कोई बड़ा नुकसान पहुँचा सकती है। ज्ञापन में मांग की गई है कि इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों से करवाई जाए, शंकराचार्य के खिलाफ दर्ज 'झूठी' एफआईआर को तत्काल निरस्त किया जाए और षड्यंत्रकारियों पर सख्त कार्यवाही हो। प्रदर्शन के दौरान भाजपा सरकार पर इलेक्ट्रोल बॉन्ड के जरिए गौकशी करने वाली कंपनियों से चंदा लेने के भी गंभीर आरोप लगाए गए।