जिला अस्पताल में मरीज की मौत के बाद हंगामा, डॉक्टरों की सांकेतिक हड़ताल

Update: 2026-02-23 08:02 GMT

चित्तौड़गढ़ । जिला अस्पताल में  65 वर्षीय बुजुर्ग की मौत के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। सोमवार को घटना से नाराज डॉक्टरों ने एक घंटे की सांकेतिक हड़ताल की और जिला अस्पताल से जिला कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकालकर प्रदर्शन किया।

डॉक्टरों ने अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग उठाई। उन्होंने अतिरिक्त जिला कलेक्टर प्रभा गौतम और एडिशनल एसपी सरिता सिंह से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। डॉक्टरों ने कहा कि यदि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई तो भविष्य में काम करना मुश्किल हो जाएगा।

प्रदर्शन के बाद डॉक्टर वापस अस्पताल लौटे और अपनी ड्यूटी संभाली। इस दौरान अस्पताल में मरीजों की काफी भीड़ देखी गई। कुछ समय के लिए मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा और डॉक्टरों के नहीं दिखने से लोग चौंक गए। हालांकि हड़ताल केवल एक घंटे की होने से कामकाज पूरी तरह प्रभावित नहीं हुआ।

जानकारी के अनुसार रविवार रात करीब 65 वर्षीय रतनलाल गुर्जर को उनके परिजन बीपी और शुगर की समस्या के चलते जिला अस्पताल लेकर आए थे। उस समय इमरजेंसी में डॉक्टर मनीष की ड्यूटी थी। उन्होंने जांच के बाद मरीज को मेल वार्ड में भर्ती कर दिया। परिजनों का आरोप है कि करीब आधे घंटे बाद रतनलाल की तबीयत अचानक बिगड़ गई।

मरीज को तुरंत आईसीयू में शिफ्ट किया गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। डॉक्टरों का कहना है कि मरीज की हालत पहले से ही गंभीर थी और उसे बचाने की पूरी कोशिश की गई।

मौत की सूचना मिलते ही परिजन आक्रोशित हो गए। आरोप है कि गुस्से में परिजनों ने इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टर मनीष के साथ धक्का-मुक्की की और हाथ भी उठाया। मौके पर पहुंचे डॉक्टर जगदीश के साथ भी अभद्र व्यवहार किया गया। अस्पताल परिसर में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

सूचना मिलने पर सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस की समझाइश के बाद मामला शांत हुआ, लेकिन डॉक्टर इस घटना से आहत नजर आए।

घटना के विरोध में सोमवार को डॉक्टरों ने सामूहिक रूप से एक घंटे का कार्य बहिष्कार किया और पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। वहां अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर अस्पताल में पर्याप्त सुरक्षा गार्ड तैनात करने की मांग की गई।

डॉक्टरों का कहना है कि लगातार बढ़ रही ऐसी घटनाएं उनके मन में भय का माहौल पैदा कर रही हैं और इससे इलाज व्यवस्था प्रभावित होती है। फिलहाल इस मामले में सदर थाने में कोई लिखित रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई है। प्रशासन ने डॉक्टरों को उचित सुरक्षा का भरोसा दिलाया है।

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