दो से अधिक संतान की बाध्यता हटाना लोकतंत्र को मजबूत करने वाला कदम– विधायक कृपलानी
निंबाहेड़ा।
पूर्व यूडीएच मंत्री एवं विधायक श्रीचंद कृपलानी ने विधानसभा में राजस्थान नगर पालिका (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा करते हुए इसका समर्थन किया और कहा कि यह संशोधन लोकतंत्र की भावना को और अधिक मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण निर्णय है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का मूल आधार जनता पर विश्वास करना और हर नागरिक को आगे आने का अवसर देना है।
विधायक कृपलानी ने कहा कि पहले लागू प्रावधान के अनुसार दो से अधिक संतान वाले व्यक्ति को चुनाव लड़ने से रोका जाता था, जो कहीं न कहीं लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित करता था। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की काबिलियत, ईमानदारी और जनसेवा की भावना का आकलन उसके परिवार के आकार से नहीं किया जा सकता। यदि जनता किसी व्यक्ति को अपना प्रतिनिधि बनाना चाहती है, तो उसे चुनाव लड़ने से रोकना लोकतंत्र की भावना के विपरीत है।
कृपलानी ने इस मुद्दे पर कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि आज जो लोग इस संशोधन का विरोध कर रहे हैं, वही वर्षों तक परिवारवाद की राजनीति को बढ़ावा देते रहे हैं। जिन दलों में पिता के बाद बेटा, बेटे के बाद पोता और एक ही परिवार के कई सदस्य राजनीति में पदों पर काबिज रहे, वे आज परिवार और जनसंख्या पर उपदेश दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को जनसंख्या की चिंता कम और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा की चिंता अधिक है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को डर है कि यदि यह प्रतिबंध हट गया तो गांव का किसान, ढाणी का नौजवान, मेहनतकश मजदूर और सामान्य परिवार का व्यक्ति भी चुनाव मैदान में उतर सकेगा। जब आम आदमी चुनाव लड़ेगा तो जनता यह भी पूछेगी कि विकास किसने किया और केवल भाषण किसने दिए।
विधायक कृपलानी ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण का समाधान लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित करने में नहीं, बल्कि शिक्षा, जागरूकता, महिला सशक्तिकरण और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से संभव है। इन सभी क्षेत्रों में सरकार लगातार काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि कई बार सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के कारण परिवार में अधिक संतान हो सकती है, लेकिन इसके आधार पर किसी योग्य व्यक्ति को लोकतंत्र से बाहर कर देना न्याय और समानता की भावना के विपरीत है। यह संशोधन ऐसी अन्यायपूर्ण स्थिति को समाप्त करने वाला कदम है।
विधायक कृपलानी ने कहा कि यह विधेयक लोकतंत्र को मजबूत करने, समाज के हर वर्ग को अवसर देने और समानता की भावना को सुदृढ़ करने वाला है। उन्होंने सदन से आग्रह किया कि इस संशोधन विधेयक को पारित किया जाए।
