दिल्ली का डरावना सच,: दस साल में 37 हजार लड़कियां गायब, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

Update: 2026-02-05 10:17 GMT

 देश की राजधानी दिल्ली में नाबालिगों के गायब होने के मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में दिल्ली पुलिस द्वारा जारी आंकड़ों के बाद अब दस वर्षों का नया डाटा सामने आया है, जिसमें खुलासा हुआ है कि एक दशक में करीब 37 हजार नाबालिग लड़कियां लापता हो चुकी हैं। यह आंकड़ा बेहद चौंकाने वाला माना जा रहा है और इससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक स्थिति और भी गंभीर है, क्योंकि करीब साढ़े चार हजार किशोरियों समेत छह हजार से अधिक लड़के लड़कियों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। आशंका जताई जा रही है कि इनमें से कई की हत्या कर दी गई हो सकती है या उन्हें मानव तस्करी और देह व्यापार जैसे अपराधों में धकेल दिया गया हो। हालात केवल दिल्ली तक सीमित नहीं बताए जा रहे, बल्कि एनसीआर के अन्य शहरों में भी इसी तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

राष्ट्रीय बाल अधिकार एवं संरक्षण आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने एक निजी चैनल से बातचीत में कहा कि दिल्ली और एनसीआर में हर साल नाबालिगों के गायब होने के मामले दर्ज होते रहते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले दस सालों में 50 हजार से ज्यादा नाबालिग लापता हुए हैं, जिनमें से 37 हजार लड़कियां हैं।

हाल ही में दिल्ली पुलिस ने जनवरी के पहले पंद्रह दिनों के आंकड़े भी साझा किए थे। इसमें सामने आया था कि राजधानी में रोज औसतन 54 लोग गायब हो रहे हैं। एक जनवरी से पंद्रह जनवरी के बीच कुल 807 लोगों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज हुई थी। इनमें 509 महिलाएं और लड़कियां थीं, जबकि 298 पुरुषों के लापता होने की पुष्टि हुई। आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में प्रतिदिन औसतन 13 बच्चे गायब हुए, जिसने हालात की गंभीरता को उजागर कर दिया है।

इन आंकड़ों के सामने आने के बाद कानून व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल तेज हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिसिंग, निगरानी तंत्र और सामाजिक जागरूकता को और मजबूत किए जाने की जरूरत है, ताकि इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।

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