मानवता को झकझोर देने वाली दरिंदगी: कोठारी नदी में फेंकी गई नवजात बच्ची, मां की ममता पर लगा कलंक

Update: 2026-02-05 07:47 GMT

मांडल क्षेत्र की दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे समाज को कटघरे में खड़ा किया

भीलवाड़ा BHN. मांडल थाना क्षेत्र के आरजिया इलाके से सामने आई यह घटना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि पूरे समाज की संवेदनाओं पर करारा तमाचा है। जिस मां ने नौ महीने तक अपनी कोख में बच्ची को पाला, प्रसव की असहनीय पीड़ा सही, उसी मां ने जन्म के तुरंत बाद अपनी नवजात बच्ची को कोठारी नदी में फेंक दिया। यह क्रूरता, यह निर्दयता और यह अमानवीयता हर सोचने वाले इंसान को झकझोर देने वाली है।

नदी में तैरता शव, सिहर उठा गांव

गुरुवार सुबह आरजिया गांव के पास कोटा बाइपास स्थित कोठारी नदी में उस समय सनसनी फैल गई, जब ग्रामीणों की नजर पानी में तैरते एक नवजात बच्ची के शव पर पड़ी। मासूम देह को देखकर मौके पर मौजूद लोग स्तब्ध रह गए। कुछ की आंखें भर आईं, तो कुछ गुस्से से कांप उठे। कुछ ही देर में खबर पूरे इलाके में फैल गई और नदी किनारे लोगों की भीड़ जमा हो गई।

जानबूझकर मौत के हवाले की गई मासूम

ग्रामीणों का कहना है कि बच्ची को मरने के इरादे से ही नदी में फेंका गया। सूचना मिलने पर मांडल थाना पुलिस मौके पर पहुंची। सहायक उप निरीक्षक केसी धाबाई के नेतृत्व में पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से बच्ची के शव को नदी से बाहर निकलवाया और राजकीय अस्पताल भिजवाया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने भी इस आशंका को सही ठहराया कि जन्म के बाद बच्ची को जीवित अवस्था में नदी में फेंका गया था।

कुमाता के खिलाफ मामला दर्ज, तलाश जारी

पुलिस ने अज्ञात महिला के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आसपास के क्षेत्रों में पूछताछ की जा रही है, अस्पतालों और आशा कार्यकर्ताओं से भी जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि उस निर्दयी मां तक पहुंचा जा सके, जिसने ममता को शर्मसार किया।

बेटी बचाओ के नारों पर सवाल

यह घटना उस समाज के मुंह पर तमाचा है, जहां मंचों से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के नारे लगाए जाते हैं। सवाल यह है कि जब जन्म लेते ही बेटियों को मौत के घाट उतार दिया जाएगा, तो ऐसे नारों का क्या अर्थ रह जाएगा। यह केवल एक मां का अपराध नहीं, बल्कि उस सामाजिक सोच की हार है, जो आज भी बेटी को बोझ मानती है।

लगातार सामने आ रही शर्मनाक घटनाएं

चौंकाने वाली बात यह है कि महज चार दिन पहले ही भीलवाड़ा के मातृ एवं शिशू चिकित्सालय परिसर स्थित पालना गृह में एक नवजात शिशु को छोड़ दिया गया था, जिसका फिलहाल उपचार चल रहा है। जिले में लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं प्रशासन और समाज दोनों के लिए गंभीर चेतावनी हैं।

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