राजस्थान में पंचायतों की सियासत का बड़ा 'गेम चेंजर':: 31 साल पुरानी दो बच्चों की बाध्यता खत्म, अब कितने भी बच्चे हों... लड़ सकेंगे चुनाव!

Update: 2026-03-09 17:32 GMT


जयपुर। राजस्थान की ग्रामीण राजनीति में आज एक ऐतिहासिक और बड़ा बदलाव हो गया है। विधानसभा में सोमवार को 'राजस्थान पंचायतीराज संशोधन विधेयक 2026' को लंबी बहस के बाद सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। इस बिल के पास होते ही अब प्रदेश में वार्ड पंच से लेकर जिला प्रमुख तक का चुनाव लड़ने के लिए दो बच्चों की अनिवार्य शर्त को जड़ से खत्म कर दिया गया है।

धारा 19 में हुआ बदलाव: खुल गए सियासत के बंद दरवाजे

राज्य सरकार ने राजस्थान पंचायतीराज कानून की धारा 19 में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। अब तक इस धारा के तहत दो से ज्यादा संतान वाले व्यक्ति को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माना जाता था। लेकिन अब यह बाधा हट चुकी है। अब चाहे वार्ड पंच हो, सरपंच हो या जिला परिषद सदस्य—बच्चों की संख्या किसी की राजनीतिक महत्वाकांक्षा के आड़े नहीं आएगी।

31 साल पुराने 'शेखावत युग' के नियम का अंत

यह प्रावधान 31 साल पहले तत्कालीन भैरोंसिंह शेखावत सरकार द्वारा जनसंख्या नियंत्रण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू किया गया था। तीन दशकों तक इस नियम के कारण हजारों जमीनी नेता चुनाव लड़ने से वंचित रह गए थे या उन्हें कानूनी पेचीदगियों का सामना करना पड़ता था। आज विधानसभा ने इस पुराने प्रावधान को खत्म कर एक नए युग की शुरुआत की है।

गांवों में मचेगी सियासी हलचल: बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा

इस फैसले का सीधा असर गांवों की चौपालों और स्थानीय समीकरणों पर पड़ेगा:

दिग्गजों की वापसी: कई कद्दावर नेता जो सिर्फ बच्चों की संख्या के कारण पिछले कई चुनावों से मैदान से बाहर थे, अब फिर से ताल ठोकते नजर आएंगे।बढ़ेगी चुनौती: चुनावी मैदान में अब उम्मीदवारों की संख्या बढ़ेगी, जिससे मौजूदा जनप्रतिनिधियों के लिए मुकाबला और भी कड़ा होने वाला है।

बदलेंगे समीकरण: जातिगत और स्थानीय समीकरणों में अब उन परिवारों की भूमिका बढ़ जाएगी जो बड़े कुनबे वाले हैं।

अब आगे क्या? राज्यपाल की मुहर का इंतजार

विधानसभा से पारित होने के बाद अब इस बिल को राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राजभवन से हरी झंडी मिलते ही गजट नोटिफिकेशन जारी होगा और यह कानून पूरे प्रदेश में प्रभावी हो जाएगा।

कल की बड़ी खबर पर नजर: पंचायतीराज के बाद अब शहरों की बारी है। मंगलवार को विधानसभा में 'राजस्थान नगरपालिका संशोधन बिल' पेश किया जाएगा, जिससे नगर निगम और नगर पालिकाओं में भी दो बच्चों की बाध्यता खत्म होने का रास्ता साफ होगा।

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